‘शुद्धिकरण’ विवाद: उत्तराखंड के हल्द्वानी में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

देहरादून, 8 सितंबर . नैनीताल पुलिस ने मंगलवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. यह मामला 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद एक जगह पर कथित ‘शुद्धिकरण’ की रस्म से जुड़ा है.

इससे पहले, इस आरोप को लेकर बेंगलुरु में एक ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई थी.

मीडिया से बात करते हुए सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसएसपी) मंजूनाथ टीसी ने कहा कि राज्य भर में अलग-अलग संगठनों, लोगों और समूहों से इस घटना के बारे में शिकायतें और आवेदन मिल रहे थे. अकेले नैनीताल जिले में ही 19 से ज्यादा आवेदन मिले. इन सभी की कानूनी तौर पर जांच की जा रही थी. इसी आधार पर, अंजू की औपचारिक लिखित शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया है, जिन्होंने इस मामले में सबसे पहले शिकायत की थी.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत करने वाली महिला हल्द्वानी की ही रहने वाली है.

उन्होंने कहा कि उन्होंने इस पर कार्रवाई की मांग की थी, जिसकी मांग कई राजनीतिक पार्टियां भी कर रही थीं. कानूनी जांच और समीक्षा के बाद, अब अंजू की शिकायत के आधार पर हल्द्वानी कोतवाली में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.”

नैनीताल के एसएसपी ने आगे कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सीनियर अधिकारी और आईपीएस जगदीश चंद्र को इस मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया है.

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और जो कोई भी इससे जुड़ा कोई सबूत देना चाहता है, वह जांच अधिकारी से संपर्क कर सकता है.

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन यह मामला रामलीला मैदान में कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण अनुष्ठान से जुड़ा है.

इस बीच, इस मामले में शिकायतकर्ता वकील अंजू ने राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के उन दावों को खारिज कर दिया कि कथित शुद्धिकरण का काम ‘जिहादी नारों’ के जवाब में किया गया था.

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं भी उस दिन मल्लिकार्जुन खड़गे का भाषण सुनने के लिए वहां मौजूद थी. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. कुछ लोग अपने राजनीतिक फायदे के लिए सोशल मीडिया पर एडिट किए गए वीडियो और भ्रामक बातें पोस्ट कर रहे हैं. मैंने एफआईआर में किसी का नाम नहीं लिया है और न ही मेरी किसी से कोई निजी दुश्मनी है.

उन्होंने दावा किया कि सच्चाई जाने बिना भ्रामक वीडियो शेयर करके सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है.

एमएस/