‘सिनेमा के जरिए पशु संवेदनशीलता बढ़ाएंगे’, मेनका गांधी ने लॉन्च किया ‘सिनेकाइंड’

मुंबई, 10 सितंबर . भारतीय सिनेमा में पशु कल्याण और जानवरों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने ‘सिनेकाइंड’ पहल की घोषणा की है. फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) और पीपल फॉर एनिमल्स (पीएफए) की इस पहल के तहत 4 अक्टूबर को 11 पुरस्कार दिए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य सिनेमा से जुड़े लोगों को जानवरों के कल्याण और उनके प्रति जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना है.

मेनका गांधी ने लोगों से अपील की कि वे इस पहल और 4 अक्टूबर को होने वाले पुरस्कार समारोह की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं. ये पुरस्कार छोटे स्तर के नहीं हैं, बल्कि काफी महत्वपूर्ण पुरस्कार हैं और इनका उद्देश्य भारतीय सिनेमा में पशु कल्याण से जुड़े प्रयासों को पहचान देना है. इस पहल में बॉलीवुड से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है, क्योंकि फिल्मों और फिल्मी हस्तियों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. फिल्म जगत में जो बातें कही जाती हैं, उनका असर आम लोगों के व्यवहार और सोच पर भी पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि इसी वजह से सिनेमा से जुड़े लोगों को पशु कल्याण की मुहिम में शामिल करना जरूरी है. अगर फिल्म उद्योग के स्तर पर जानवरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है तो उसका व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकता है.

मेनका गांधी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में जानवरों के मांस के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह केवल नागालैंड तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग जानवरों को खाने की बात सामने आती है. नागालैंड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां ऐसे जानवरों को भी खाए जाने की बात सामने आती है, जिन्हें वह गैरकानूनी मानती हैं. उन्होंने एफएसएसएआई के आदेश का हवाला देते हुए दावा किया कि कुत्ते, ऊंट, गधे और घोड़े जैसे जानवरों को खाने की अनुमति नहीं है, लेकिन कुछ जगहों पर इन्हें चोरी-छिपे खाया जाता है और नागालैंड में यह खुले तौर पर होता है.

मेनका गांधी ने आगे कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है. उन्होंने लोगों से पशु संरक्षण के लिए एकजुट होने की अपील की. फिल्म ‘ओ माई डॉग’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से जानवरों को पुलिस की मदद से नागालैंड भेजे जाने की बात सामने आती है. इस मुद्दे पर लोगों को एक साथ आकर काम करने की जरूरत है.

इस दौरान उन्होंने देश में जानवरों की रक्षा और उन्हें भोजन उपलब्ध कराने वाले लोगों की संख्या को लेकर बड़ा दावा किया. मेनका गांधी ने कहा कि मेरे अनुभव और आकलन के आधार पर करीब साढ़े चार करोड़ लोग ऐसे हैं जो रोजाना जानवरों को खाना खिलाने और उनकी रक्षा करने के लिए निकलते हैं.

पीएसके/डीकेपी