साहिबगंज में भाजपा का प्रदर्शन, बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर लगाया नौकरियां बेचने का आरोप

गोड्डा, 11 सितंबर . झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर युवाओं की नौकरियां बेचने और खनिज नीति से राज्य का कारोबार बर्बाद करने का आरोप लगाया है. साहिबगंज में छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि पिछले 5-6 साल में जेएसएससी और जेपीएससी की गजेटेड और नॉन-गजेटेड सभी भर्तियों में धांधली हुई है, जिससे युवा कभी आयोग के दफ्तर तो कभी हाईकोर्ट-Supreme Court के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

बाबूलाल मरांडी ने कहा, “छात्रों के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी 8 से 12 सितंबर तक झारखंड के सभी जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रही है. हम 8 सितंबर को दुमका में थे, 9 सितंबर को पाकुड़ में थे और 10 सितंबर को हमने साहिबगंज में प्रदर्शन में हिस्सा लिया. 12 सितंबर को हम गिरिडीह में प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे. प्रदेश के और भी नेता हैं, जो अलग-अलग जिलों में जा रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि झारखंड में दो मुख्य एजेंसियां हैं जिनके जरिए नियुक्तियां होती हैं. पहली है झारखंड कर्मचारी चयन आयोग, जो नॉन-गजेटेड कर्मचारियों की बहाली करती है और दूसरी है झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन, जो राज्य के अधिकारियों की नियुक्ति करती है. जब से हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं, पिछले 5-6 साल में चाहे गजेटेड हो या नॉन-गजटेड, ज्यादातर नौकरियों को बेच दिया गया. झारखंड के युवा लगातार संघर्ष कर रहे हैं. कभी वे जेएसएससी दफ्तर का घेराव करते हैं, कभी जेपीएससी दफ्तर का, कभी विधानसभा का घेराव करते हैं, तो कभी हाईकोर्ट और Supreme Court के चक्कर लगाते हैं.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब भी लोग विरोध करते हैं, उन पर हमला किया जाता है. पिछले महीने की 21 तारीख को युवाओं ने पुतला दहन कर विरोध जताया था, तो सीएम के गुंडों ने लाठी-डंडों से युवाओं की पिटाई कर दी. आपने इसका वीडियो देखा होगा. गिरिडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, गढ़वा समेत कई जिलों में ऐसी घटनाएं हुई हैं. सरकार ने बिना किसी शर्त के पूरे विज्ञापन को वापस ले लिया है. यही हाल जेएसएससी और जेपीएससी का भी है.

खान-खनिज संशोधन को लेकर उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने एमएमडीआर अधिनियम देश हित, राज्य हित और झारखंड के हित में बनाया है. यह कानून सिर्फ झारखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है. यह कानून प्रमुख खनिजों पर लागू होता है, गौण खनिजों पर नहीं. प्रमुख खनिजों का मतलब है कि यह कानून कोयले और लौह अयस्क जैसे खनिजों पर लागू होता है. सरकार इस पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगा सकती. अगर अतिरिक्त कर लगाया गया, तो इससे देश के कारोबार और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ेगा.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इसी वजह से सरकार यह कानून लेकर आई है. सरकार ने कोयले पर 400 रुपए प्रति टन का टैक्स लगा दिया है. इसका मतलब है कि लालमटिया से जो कोयला निकलता है, उस पर भारी टैक्स देना होगा. एक हाइवा में करीब 30 टन कोयला आता है, तो 30 टन पर 400 रुपए के हिसाब से 12,000 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे. ऐसे में कोई लालमटिया से कोयला क्यों लेगा? लोग बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा या विदेश से कोयला मंगाना पसंद करेंगे. इससे झारखंड का कारोबार पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा.

केके/वीसी