
जम्मू, 12 सितंबर . कश्मीरी पंडितों को मिली कथित धमकी भरी चिट्ठी को लेकर जम्मू-कश्मीर में सियासत तेज हो गई है. भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने इस मामले को निंदनीय बताते हुए धमकी के स्रोत और इसके पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचने की मांग की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए. रंधावा ने कहा कि जिन लोगों को धमकी मिली है, उनकी शिकायत को गंभीरता से लेकर उसकी सत्यता की जांच होनी चाहिए.
विक्रम रंधावा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात बदलने और विकास की बातों के बीच कश्मीरी पंडितों को धमकी मिलना बेहद निंदनीय है. पहले जिस नौजवान के हाथ में पत्थर थमाए जाने की बात होती थी, आज उसी नौजवान के हाथ में कंप्यूटर, कुरान और कलम है. ऐसे माहौल में भी यदि धमकियां मिल रही हैं तो यह पता लगाना जरूरी है कि धमकियां कहां से आ रही हैं और इनके पीछे कौन से सूत्र हैं. धमकी देने वालों की पहचान और उनके नेटवर्क की जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है. रंधावा ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को उठाने वाले लोगों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहे हैं.
भाजपा विधायक ने कहा कि जिन लोगों को धमकी मिली है और जो प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं, सरकार को उन्हें बुलाकर उनकी शिकायत सुननी चाहिए. धमकी भरी चिट्ठी की जांच और सत्यापन कराया जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके. यदि किसी व्यक्ति या समूह पर आरोप लगाया जा रहा है तो संबंधित लोगों को बुलाकर पूछताछ की जानी चाहिए. जब किसी समुदाय को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो रहा हो तो सरकार को मामले को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
उन्होंने गृह विभाग तक मामला पहुंचने का जिक्र करते हुए कहा कि जब स्थिति गंभीर हो जाती है तभी लोग गृह मंत्री की ओर देखते हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है और मुख्यमंत्री केवल औपचारिक भूमिका निभा रहे हैं.
एनआईए कोर्ट द्वारा आतंकी मसूद अजहर के खिलाफ दूसरी बार वारंट जारी किए जाने पर विक्रम रंधावा ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि एजेंसियां अपना काम मुस्तैदी से कर रही हैं और उनके काम पर विश्वास किया जाना चाहिए. जब एनआईए किसी मामले को अपने हाथ में लेती है तो उसे उसके अंजाम तक पहुंचाने का प्रयास करती है. इस मामले में भी जांच एजेंसी कानून के तहत आगे की कार्रवाई करेगी.
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी रंधावा ने कहा कि दिल्ली में ब्रिक्स का आयोजन भारत के लिए गौरव का विषय है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के प्रमुख नेताओं को एक मंच पर लाने में सफल रहे हैं. कांग्रेस इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर भी राजनीति कर रही है. विपक्ष को भारत की वैश्विक भूमिका और विकास को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए. उन्होंने ब्रिक्स में हो रही गतिविधियों के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की.
जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा कुछ दिनों के लिए विधानसभा सत्र बुलाए जाने के फैसले पर भी रंधावा ने सवाल उठाए. उन्होंने इसे सरकार की कमजोरी का संकेत बताया. उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष और जनता के सवालों का सामना करने से बचना चाहती है, इसलिए विधानसभा सत्र की अवधि छोटी रखी गई है. विधानसभा में विपक्ष सरकार को जनता से जुड़े मुद्दों पर घेरने का काम करेगा. भाजपा जम्मू-कश्मीर की प्रमुख विपक्षी पार्टी के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाएगी और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाएगी.
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पीएसके