चुनाव हारने के बाद इस्तीफा वापस लेने की मांग खारिज, राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

जयपुर, 12 सितंबर . राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि चुनाव लड़ने के लिए नौकरी से इस्तीफा देने वाला कोई सरकारी कर्मचारी सिर्फ इसलिए दोबारा नौकरी पाने का दावा नहीं कर सकता कि वह चुनाव हार गया है.

जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की डिवीजन बेंच ने नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के पूर्व सीनियर ऑडिटर नीरज बिश्नोई की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया.

कोर्ट ने कहा कि चुनाव में हार अपने आप में कोई मजबूत वजह या हालात में बड़ा बदलाव नहीं है, जिसके आधार पर लागू सर्विस नियमों के तहत इस्तीफा वापस लिया जा सके.

नीरज बिश्नोई ने राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए 10 अक्टूबर, 2023 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. रेलवे ने 1 नवंबर, 2023 से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इसके बाद उन्होंने चूरू जिले की रतनगढ़ विधानसभा सीट से बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 1 जनवरी, 2024 को बिश्नोई ने अपना इस्तीफा वापस लेने और सरकारी नौकरी में बहाली के लिए आवेदन किया.

विभाग ने 29 जनवरी, 2024 को उनकी अर्जी खारिज कर दी. इसके बाद 22 फरवरी, 2024 को उनकी अपील भी खारिज कर दी गई.

फिर वे सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी), जयपुर गए और बाद में हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी. हाईकोर्ट में बिश्नोई के वकील ने दलील दी कि इस्तीफा वापस लेने की अर्जी नियमों के तहत तय 90 दिनों की समय-सीमा के भीतर दी गई थी. यह भी तर्क दिया गया कि इस्तीफा देते समय बिश्नोई को इस बात की जानकारी नहीं थी कि इस फैसले का असर उनकी पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े अन्य लाभों पर पड़ेगा.

याचिका के अनुसार उन्हें चुनाव हारने के बाद ही इसके नतीजों के बारे में पता चला. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यह हालात में बदलाव के बराबर है और उन्हें अपना इस्तीफा वापस लेने की इजाजत मिलनी चाहिए थी. विभाग ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि बिश्नोई ने चुनाव लड़ने के मकसद से ही अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया था. उस फैसले पर अमल करने के बाद वे सिर्फ इसलिए अपना इस्तीफा वापस नहीं ले सकते थे कि वे चुनाव में सफल नहीं हो पाए.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सीएटी के फैसले को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि बाद में यह एहसास होना कि इस्तीफे का असर पेंशन और रिटायरमेंट लाभों पर पड़ेगा. इस्तीफा वापस लेने से जुड़े नियमों के तहत मजबूत वजह नहीं माना जा सकता.

बेंच ने कहा कि बिश्नोई ने चुनाव लड़ने के मकसद से अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया था और बाद में चुनावी मैदान में उतरकर उस फैसले पर अमल भी किया था. हाई कोर्ट ने सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 2021 का जिक्र किया, जिसके तहत इस्तीफा वापस लेने के लिए कुछ खास शर्तें पूरी करनी होती हैं. इन शर्तों में इस्तीफे के लिए कोई ठोस वजह होना और उस वजह से जुड़े हालात में बड़ा बदलाव आना शामिल है.

कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े नियमों पर भी विचार किया. सीसीएस (कंडक्ट) रूल्स, 1964 के तहत, सरकारी कर्मचारियों को राजनीतिक रूप से निष्पक्ष रहना होता है और नियमों में बताए गए तरीके से राजनीतिक गतिविधियों और चुनावों में हिस्सा लेने पर रोक होती है.

कोर्ट ने माना कि इस मामले में इस्तीफा वापस लेने की इजाजत देने का मतलब यह होगा कि याचिकाकर्ता को इस्तीफे के बाद की अवधि में भी लगातार सरकारी सेवा में माना जाए, जिसमें वह समय भी शामिल है जब उसने चुनाव लड़ा था.

नतीजतन, कोर्ट को सीएटी के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं मिला और उसने याचिका खारिज कर दी.

डीकेएम/वीसी