
शिमला, 12 सितंबर . हिमाचल प्रदेश सरकार में लोक निर्माण और शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने ब्रिक्स समिट को भारत के लिए गर्व का क्षण बताया. नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह किसी पार्टी का नहीं, बल्कि देशहित का मामला है और कांग्रेस पार्टी इसका स्वागत करती है.
विक्रमादित्य सिंह ने कहा, “ब्रिक्स कई देशों का समूह है, जिसमें भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है और यह सभी राज्यों के लिए अहम है. वर्तमान में भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है, जिसके तहत यह अंतरराष्ट्रीय बैठक दिल्ली में आयोजित हो रही है. कांग्रेस पार्टी ने भी इसका स्वागत किया है. पूर्व में कांग्रेस सरकारों ने हमेशा ब्रिक्स को मजबूत करने का प्रयास किया है. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इसे अमली जामा पहनाया जा रहा है. इसमें चीन और रूस के राष्ट्रपति समेत दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और अन्य सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष आए हैं, जो गर्व की बात है.”
मंत्री ने कहा कि इस समिट में भारत के हितों के साथ-साथ युवाओं के रोजगार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी और रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर सकारात्मक चर्चा होगी. हिमाचल के लिए भी हॉर्टिकल्चर को बेहतर करने और आईटी हब बनाने पर मंथन होना चाहिए. देश में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें चीन अग्रणी है. इस तकनीक में निवेश से देश में रोजगार बढ़ेगा और पर्यावरण को भी फायदा होगा.
उन्होंने रक्षा सहयोग को लेकर कहा कि रूस भारत का पुराना मित्र रहा है. 1971 के युद्ध में जब पाकिस्तान के साथ संघर्ष चल रहा था, तब रूस चट्टान की तरह भारत के साथ खड़ा रहा, जिससे बांग्लादेश का निर्माण हुआ. एस-400 और ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल जैसे प्रोजेक्ट भारत की शान हैं और इस साझेदारी को और मजबूत करने की जरूरत है. यह किसी पार्टी का नहीं, बल्कि देशहित का मामला है. इससे भारत को फायदा होगा और ग्लोबल साउथ में भारत की अग्रणी भूमिका और मजबूत होगी.
उन्होंने हिंद महासागर से विश्व के एक तिहाई वैश्विक व्यापार के गुजरने का जिक्र करते हुए कहा कि यहां भारत की मौजूदगी बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होनी चाहिए.
पेट्रो डॉलर में व्यापार को लेकर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह एक व्यापक चर्चा का विषय है. पेट्रो डॉलर आज एक हकीकत है; जब भी कोई देश किसी अन्य देश से तेल खरीदता है, तो लेन-देन पेट्रो डॉलर में होता है, जिसका सीधा फायदा अमेरिका को मिलता है. इसलिए एक वैकल्पिक करेंसी सिस्टम होना चाहिए और इसमें ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. इसमें चीन का युआन, भारतीय रुपया और अन्य सदस्य देशों की करेंसी भी इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन के लिए वैकल्पिक रूप में स्वीकार होनी चाहिए. यह एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है. अमेरिका निश्चित तौर पर चाहेगा कि आर्थिक दुनिया में उसी का दबदबा बना रहे, लेकिन हमें इससे मुकाबला करने की जरूरत है.
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केके/एबीएम