
नई दिल्ली, 15 सितंबर . चेक बाउंस के सात मामलों में सजा का सामना कर रहे अभिनेता राजपाल यादव को Supreme Court से फिलहाल थोड़ी राहत मिली है. उन्हें अदालत ने पैसे का इंतजाम करने के लिए दो हफ्ते का आखिरी मौका दिया है.
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से उनके वकील ने कोर्ट से अपील की कि अभिनेता को दोबारा जेल भेजने से फिलहाल कोई फायदा नहीं होगा और उन्हें कुछ समय दिया जाए, ताकि वह रकम का इंतजाम कर सकें. इस पर Supreme Court ने दो हफ्ते का समय देते हुए कहा कि कम से कम 2 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा. साथ ही अदालत ने साफ किया कि यह राजपाल यादव को दिया गया आखिरी मौका है.
Supreme Court ने राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट भी जमा करने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके पिछले व्यवहार को लेकर भी सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि उनके पुराने आचरण को देखते हुए आखिर उन पर भरोसा कैसे किया जा सकता है.
Supreme Court ने कहा कि राजपाल यादव फिल्मों में बहुत अच्छी एक्टिंग करते हैं और उम्मीद है कि वह कोर्ट में ऐसा नहीं करेंगे. सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ऑनलाइन जुड़े हुए थे. मामले की अगली सुनवाई अब 5 अक्टूबर को होगी.
यह पूरा मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस से जुड़ा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने इनमें राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी. सभी मामलों की सजा एक साथ चलने का आदेश दिया गया था. हाईकोर्ट के फैसले को राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने Supreme Court में चुनौती दी है. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court ने अब नोटिस जारी किया है और राजपाल यादव को पैसे जमा करने के लिए आखिरी मौका दिया है.
इस विवाद की शुरुआत करीब 16 साल पहले हुई थी. साल 2010 में राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था. फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई. फिल्म के फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव के लिए कर्ज की रकम वापस करना मुश्किल हो गया. समय बीतने के साथ ब्याज और अन्य रकम जुड़ती गई और यह विवाद करीब 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गया.
कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत पहुंच गया. साल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को मामले में दोषी ठहराया था. इसके बाद मामला अलग-अलग अदालतों से होता हुआ दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा. हाईकोर्ट ने भी सातों मामलों में राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा और उन्हें हर मामले में तीन महीने की सजा सुनाई. शिकायतकर्ताओं को रकम लौटाने का आदेश भी दिया गया.
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पीके/एबीएम