
नई दिल्ली, 18 सितंबर . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि वर्ष 2014 से पहले भारत में हताशा और निराशा का माहौल था. भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण आम लोगों का मनोबल टूट चुका था. ऐसे हालात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार बनी. हमने विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनसे लड़ने का रोडमैप तैयार किया.
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में दुनिया ने कोविड जैसी महामारी का सामना किया और कई युद्ध भी देखे. इससे विश्व की अर्थव्यवस्था बहुत प्रभावित हुई. हमने हर आपदा को अवसर में बदला और आगे बढ़ते रहे. इसका परिणाम है कि भारत आज आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सबने देखा कि हम आज सीमा के पार जाकर भी दुष्टों का अंत कर रहे हैं. आज नक्सलवाद भी लगभग समाप्त हो चुका है. रक्षा मंत्री ने ये बातें ‘रामायण-एक महाकाव्य, अनेक कथाएं : भारत और दुनिया में रामकथा’ के उद्घाटन समारोह में कहीं. यह तीन दिवसीय सम्मेलन है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत एक सभ्यतागत लीडर बनकर उभरा है. आज पूरी दुनिया ‘योग दिवस’ मना रही है. भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से विश्व को नेतृत्व प्रदान कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र की सफलता हो या फिर कल्याणकारी योजनाओं की सफलता, आज हम दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत हैं. आज यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय भुगतान प्रणाली है और 10 से ज्यादा देश इसे अपना चुके हैं.
राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी ताकत हमारे युवा हैं. आज देश के युवा स्टार्टअप खड़े कर रहे हैं और यूनिकॉर्न कंपनियां बना रहे हैं. हमारे युवा अपने पुरुषार्थ से भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. आज भारत अपने प्रयासों से पूरी दुनिया की उम्मीद बन गया है. भारत ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए तय किए गए कई लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं.
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भगवान श्रीराम का मंदिर बनने में सात दशक क्यों लग गए. भगवान राम के ही अस्तित्व पर सवाल क्यों उठाए गए. यह तुष्टीकरण की राजनीति के कारण हुआ. भारत पर थोपी गई पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता की एक गलत अवधारणा के कारण यह हुआ. यह अवधारणा धर्म को राज्य और राजनीति के विरोधी के रूप में देखती है. यह विचार भारतीय जीवन-दृष्टि के अनुकूल नहीं है. आज भारत भगवान राम के गुणों को आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है.
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जीसीबी/एएस