झारखंड की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता विमला प्रधान का निधन, रांची के हॉस्पिटल में ली अंतिम सांस

रांची, 18 सितंबर . झारखंड सरकार की पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता विमला प्रधान का शुक्रवार को रांची में निधन हो गया. वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और सैमफोर्ड अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. इलाज के दौरान उन्होंने शुक्रवार देर शाम अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर सामने आने के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है.

विमला प्रधान सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक चुनी गई थीं. उन्होंने वर्ष 2009 और 2014 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. विधायक के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाया और पार्टी संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाई.

विमला प्रधान झारखंड सरकार में पर्यटन, समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी थीं. मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में पर्यटन और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी उनके पास रही. विधानसभा में उनके कार्यों और सक्रियता को देखते हुए वर्ष 2017 में उन्हें ‘उत्कृष्ट विधायक’ सम्मान से नवाजा गया था. यह सम्मान झारखंड विधानसभा की समिति की ओर से दिया गया था.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन राज्य, समाज और संगठन के लिए अपूरणीय क्षति है. मुंडा ने कहा कि विमला प्रधान ने अपना जीवन जनसेवा, विशेषकर जनजातीय समाज के उत्थान और कल्याण के लिए समर्पित किया.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी उनके निधन पर शोक जताया. उन्होंने कहा कि विमला प्रधान ने अपना जीवन जनसेवा, विशेषकर जनजातीय समाज के उत्थान और कल्याण के लिए समर्पित किया. उन्होंने कहा कि समाज और संगठन के प्रति उनका समर्पण और योगदान हमेशा याद किया जाएगा.

विमला प्रधान के निधन की खबर के बाद सिमडेगा और आसपास के इलाकों में उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच शोक का माहौल है. भाजपा नेताओं ने उनके निधन को पार्टी और समाज के लिए बड़ी क्षति बताया है.

विमला प्रधान के राजनीतिक जीवन की शुरुआत क्षेत्रीय स्तर पर सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से हुई थी. बाद में वह भाजपा से जुड़ीं और पार्टी के माध्यम से सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ीं. दो बार विधायक और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में उन्होंने झारखंड की राजनीति में अपनी पहचान बनाई.

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एसएनसी/डीकेपी