
नई दिल्ली, 23 सितंबर . राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग और चल रही खास गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सिब्बल ने सीईसी को तुरंत सस्पेंड करने और पूरे देश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को रोकने की मांग की है.
कपिल सिब्बल ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने 40 अलग-अलग पोर्टल और ऐप्स को एक में मिला दिया है, यानी सारा अधिकार आयोग के पास केंद्रित कर दिया गया. यह सब कुछ आयोग की डायरेक्टर जनरल (आईटी) सीमा खन्ना के अधीन आ गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसी प्रक्रिया के तहत 30 राज्यों में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. अगर यही प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो यह संख्या 30 करोड़ तक पहुंच जाएगी.
सिब्बल ने कहा, “हमने ये बातें पहले ही Supreme Court को बता दी हैं. हम Supreme Court को हर दिन बता रहे हैं. जब भी यह मामला सामने आता है, Supreme Court हमारी बात सुनता तक नहीं है. हम कहते हैं कि उन पर भरोसा न करें, जमीनी हकीकत देखें.”
कपिल सिब्बल ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए कहा, “चुनाव आयोग में पहले एक ही सदस्य होता था, फिर संशोधन कर तीन सदस्यीय आयोग बनाया गया और तय किया गया कि सभी फैसले बहुमत से लिए जाएंगे. हालांकि आज सीईसी ज्ञानेश कुमार अपनी मनमर्जी से फैसले ले रहे हैं. चुनाव कैसे कराना है, ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) को क्या करना चाहिए, कौन सा फॉर्म भरना है, ये सब ज्ञानेश कुमार अकेले तय कर रहे हैं. दो अन्य चुनाव आयुक्तों, जोशी साहब और संधू साहब ने कई बार इसका विरोध किया. पिछले 10 महीनों में लगभग 14 बार उन्होंने विरोध जताया कि ‘आप जो कर रहे हैं वह संवैधानिक नहीं है, कानून के मुताबिक नहीं है’ लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया.”
सिब्बल ने कहा कि सभी फैसले बहुमत से लिए जाने चाहिए. अगर दो चुनाव आयुक्त विरोध करते हैं तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके मामले आयोग के सामने आए ही नहीं.
कपिल सिब्बल ने एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों ने खुद कहा है कि ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट’ के तहत एसआईआर सिर्फ खास मामलों में ही की जा सकती है. इससे पहले ऐसा सिर्फ एक बार और एक ही चुनाव क्षेत्र में हुआ था, लेकिन अब यह पूरे देश में हो रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरे देश में इसलिए किया जा रहा है ताकि चुनाव को नियंत्रित किया जा सके, यह तय किया जा सके कि वोट देने का अधिकार किसके लिए मिले और किसका नाम हटाया जाए.
फॉर्म-6 को लेकर भी सिब्बल ने गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि नए वोटर को फॉर्म-6 भरते समय यह बताना होता है कि ‘मैंने पहले कभी वोट नहीं दिया है.’ अब जिनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम लिस्ट में नहीं हैं, या जिनका नाम कट गया है, उन्हें दोबारा फॉर्म-6 भरना होगा और झूठा घोषणापत्र देना होगा कि उन्होंने पहले वोट नहीं दिया, जबकि वे पहले वोट दे चुके हैं.
सिब्बल ने मांग की कि इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जब तक जांच पूरी नहीं होती, सीईसी को सस्पेंड किया जाए और एसआईआर को तुरंत रोका जाए.
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एससीएच/पीएम