
नई दिल्ली, 23 सितंबर . भारत और जर्मनी के बीच प्रस्तावित पनडुब्बी (सबमरीन) डील को जर्मनी की तरफ से अंतिम रूप दे दिया गया है और जरूरी दस्तावेजों पर सहमति बन गई है. भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर विक ने बुधवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अब इस समझौते के लिए भारत की तरफ से आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने का इंतजार है.
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग पर विक ने से बात की. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पनडुब्बी डील को जर्मनी की तरफ से असल में अंतिम रूप दिया जा चुका है.
उन्होंने बताया कि जर्मनी ने जरूरी दस्तावेजों पर सहमति दे दी है और अब समझौता पूरा करने से पहले भारत को अपनी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं.
विक ने कहा, “दस्तावेजों के मामले में, इसे अंतिम रूप दिया जा चुका है और जर्मनी ने इस पर सहमति दे दी है. अब भारत को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करना और समझौते को अंतिम रूप देना है.”
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष पर बात करते हुए विक ने कहा कि इसे रोकने की जिम्मेदारी रूस की है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किसी भी समय युद्ध रोक सकते हैं. उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष विराम समझौते के लिए तैयार है, लेकिन रूस ने अब तक इस पर सहमति नहीं दी है.
उन्होंने कहा, “सबसे पहले, इस युद्ध को रोकने की जिम्मेदारी पुतिन की है. वो इसे कल ही रोक सकते हैं. वह हमलावर हैं और सीजफायर समझौते की राह में बाधा बने हुए हैं. यूक्रेन ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है, जबकि रूस नहीं है.”
विक ने आगे कहा, “इसलिए, हम सभी को रूस पर दबाव बनाना होगा. हमें प्रतिबंधों के जरिए लागत बढ़ाकर रूसी नेतृत्व के कॉस्ट-बेनिफिट उठाने के हिसाब-किताब को बदलना होगा.”
जर्मन राजदूत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रतिबंधों और अन्य उपायों के जरिए रूस के लिए लागत बढ़ानी चाहिए. उनके अनुसार, इसका मकसद रूसी नेतृत्व के लागत-लाभ (कॉस्ट-बेनिफिट) के हिसाब-किताब को बदलना है, ताकि देश के लिए युद्ध का खर्च उठाना और मुश्किल हो जाए.
विक ने कहा कि तेल का निर्यात रूस के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत बना हुआ है और इससे उसके सैन्य अभियानों को फंड मिलता है. उन्होंने कहा कि रूस की विदेशों में तेल बेचने की क्षमता को सीमित करने की कोशिशें की जानी चाहिए, जिससे संघर्ष को जारी रखने के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधन कम हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि अगर वह राजस्व काफी कम हो जाता है, तो संघर्ष जारी रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा.
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केआर/