
प्रयागराज, 24 सितंबर . पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) की शुरुआत 26 सितंबर 2026 (पूर्णिमा श्राद्ध) से हो रही है, लेकिन इससे पहले ही त्रिवेणी संगम पर पिंड दान और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है. अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए देश भर से लोग प्रयागराज पहुंच रहे हैं. इसे देखते हुए पंडा समुदाय और स्थानीय प्रशासन ने घाटों पर विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं.
श्रद्धालु ध्रुव तिवारी ने से बातचीत में बताया कि पितृ पक्ष से पहले ही संगम पर लोगों का आना शुरू हो गया है. उन्होंने कहा, “अब लोग धीरे-धीरे आना शुरू कर चुके हैं और अब तो काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. 26 सितंबर से पूर्ण रूप से पितृ पक्ष लग जाएगा. इस दौरान पूरे हिंदुस्तान से लोग अपने पितरों को तारने के लिए काशी और गया जी जाएंगे. वहां वे पिंड दान और तर्पण कर उनके मोक्ष के लिए प्रार्थना करेंगे. पिछले दो-तीन दिनों से भीड़ का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है.”
उन्होंने बताया कि प्रयागराज, काशी और गयाजी का पितृ पक्ष में विशेष महत्व है. यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, जहां लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करते हैं.
एक अन्य श्रद्धालु रामकरण सिंह ने कहा, “पितृ पक्ष प्रारंभ होने से पहले हम यहां आ गए हैं. इसके बाद हम गया धाम पहुंचेंगे. यह यहां का प्रथम तीर्थ है. हम हर साल यहां आते हैं और अपने पितरों के लिए पिंड दान करते हैं.”
वहीं, दिलीप नामक एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ पितरों का तर्पण करने आए हैं. उन्होंने कहा, “हम लोग पितरों का तर्पण करने के लिए आए हैं. इसके बाद हम बनारस जाएंगे और बनारस के बाद सीधे गया जाएंगे. 26 तारीख से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है और 27 तारीख तक हम लोग गया जी पहुंचकर अपना पिंड दान और तर्पण करेंगे.”
गौरतलब है कि पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में किए गए पिंड दान और तर्पण से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. इसी वजह से हर साल लाखों श्रद्धालु प्रयागराज के संगम, काशी के घाटों और गया के पहुंचते हैं.
–
पीआईएम/पीएम