झारखंड के थानों में सीसीटीवी नहीं लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस

रांची, 24 सितंबर . झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पर अवमानना की कार्रवाई का मामला बनता है. ऐसी कार्रवाई शुरू करने से पहले कोर्ट ने राज्य पुलिस के तीनों शीर्ष अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि थानों में सीसीटीवी लगाने के मामले में राज्य सरकार अदालत के आदेश का पालन नहीं करना चाहती है. सरकार अपने हलफनामे में सही स्थिति को छिपाकर टालमटोल वाला रवैया अपना रही है. ऐसे में अदालत के पास तीनों वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि साल 2018 के बाद से अब तक पुलिस हिरासत में मौत के 450 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. इसके बावजूद थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हिरासत में मौत और मारपीट जैसी घटनाओं पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का लगाया जाना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि थानों में कैमरे लगाने के लिए चार बार टेंडर निकाले गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

कोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान डीजीपी ने इस जिम्मेदारी को गृह विभाग पर डालने की कोशिश की है. यह उनका गैर जिम्मेदाराना रुख है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है. तब तक मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने आदेश का पालन नहीं होने पर डीजीपी से जवाब मांगा था.

यह पूरा मामला साल 2024 के विधानसभा चुनाव में ईचागढ़ से प्रत्याशी रहे तरुण महतो से जुड़ा है. आरोप है कि 19 नवंबर 2025 की रात पुलिस उन्हें पकड़कर थाने ले गई थी, जहां हिरासत में उनके साथ गंभीर मारपीट की गई थी. इस बर्बरता को लेकर उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था. अदालत ने इस पत्र पर खुद संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी.

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एसएनसी/एसके