
रांची, 24 सितंबर . Supreme Court के आदेश के तहत झारखंड की ओपन जेलों (ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट) में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी मॉनिटरिंग को लेकर दर्ज स्वतः संज्ञान याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.
चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने पक्ष रखते हुए बताया कि राज्य की चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक शुरू करने के प्रस्ताव को कैबिनेट से प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है. राज्य सरकार के अधिवक्ता मयंक विभोर ने अदालत को अवगत कराया कि ओपन जेलों के संचालन, विस्तारीकरण और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर एक तिमाही रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे 3 नवंबर तक हाईकोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा.
अदालत ने सरकार के इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर की तिथि निर्धारित की है. सुनवाई के दौरान पूर्व में दिए गए विवरण का भी उल्लेख हुआ, जिसमें बताया गया था कि हजारीबाग में ओपन जेल के व्यापक विस्तारीकरण के लिए 32 एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की जा चुकी है और इसका प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है. इसके अलावा महिला कैदियों के पुनर्वास और सुविधा के लिए भी ओपन जेल की अलग से विशेष व्यवस्था की जा रही है.
Supreme Court द्वारा गठित हाई पावर कमेटी में राज्य की वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वंदना दादेल को नामित किया गया है. जब तक नया सेंट्रल ओपन जेल पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक कोर्ट ने रांची, हजारीबाग और दुमका समेत चार सेंट्रल जेलों में अस्थायी रूप से ओपन बैरक व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया था.
बता दें कि यह पूरा मामला Supreme Court के उस देशव्यापी दिशा-निर्देश से जुड़ा है, जिसमें सभी राज्यों को गृह विभाग के अंतर्गत एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का आदेश दिया गया था. इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य ओपन जेलों की निगरानी करना, कैदियों के लिए जिम, बेहतर भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है. शीर्ष अदालत के इसी आदेश के आलोक में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की निगरानी शुरू की है.
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एसएनसी/डीकेपी