मतदाता सूची में नाम काटने-जोड़ने की जानकारी सार्वजनिक हो, फॉर्म-6 में बदलाव की जांच हो : टीएस सिंहदेव

नई दिल्ली, 24 सितंबर . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने चुनाव आयोग के कामकाज और बिहार में कथित एनकाउंटर को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है और यदि किसी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने समाचार एजेंसी से कहा कि चुनाव के दौरान मतदाता सूची में नाम काटे जाने और नए नाम जोड़े जाने को लेकर भी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए. चुनाव के समय जिस तरह से एक राजनीतिक दल के फायदे के लिए काम किया गया, वह सही नहीं है. फॉर्म-6 में कथित बदलावों की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि बदलाव क्यों किए गए और इन्हें किसने किया.

चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद पर टीएस सिंह देव ने कहा कि यह मामला एक संवैधानिक संस्था पर किसी व्यक्ति के कब्जे जैसा प्रतीत होता है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग के कामकाज के लिए तय कानूनी प्रावधानों से अलग नजर आता है.

टीएस सिंह देव ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संस्था है, जिसे आम सहमति या बहुमत के आधार पर निर्णय लेना चाहिए. उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि तीन में से दो सदस्यों ने बार-बार कहा कि उनसे सलाह लिए बिना फैसले लिए जा रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों में 10 महीनों में 14 बार ऐसी स्थिति का उल्लेख किया गया है. यदि आयोग के सदस्यों को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रही है तो इससे निर्णय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं.

जमुई छेड़छाड़ मामले पर भी सिंह देव ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि देश में इस तरह की घटनाओं का होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसे मामलों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

बिहार में एनकाउंटर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार का इस तरह काम करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में कानून और न्यायिक प्रक्रिया मौजूद है तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों को उसी प्रक्रिया के तहत सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अब एनकाउंटर के जरिए सजा देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो कानून के शासन के अनुरूप नहीं है.

–

एसएके/पीएम