
नई दिल्ली, 27 सितंबर भारतीय नौसेना की मदद से हवाई अड्डे पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को ड्रोन से जुड़े संभावित खतरों को पहचानने और उनसे निपटने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही, नौसेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच समन्वय को भी और मजबूत किया जा रहा है. इसके अंतर्गत हवाई अड्डे पर संभावित हवाई खतरे और ड्रोन देखे जाने की स्थिति से निपटने के लिए बहु-एजेंसी मॉक अभ्यास आयोजित किया गया. यह पूरा अभ्यास भारतीय नौसेना के समन्वय से किया गया है.
अभ्यास पोरबंदर हवाई अड्डे पर किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य किसी संभावित हवाई खतरे की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, प्रभावी संचार और त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारियों को परखना था. अभ्यास के दौरान ऐसी स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रतिक्रिया प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया. इस अभ्यास से संभावित हवाई खतरों के सामने विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और सूचना साझा करने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिली.
साथ ही, आपात स्थिति में तेजी से और प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया देने की तैयारियों को भी परखा गया. अभ्यास के बाद भारतीय नौसेना की टीम ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों के लिए ड्रोन जागरूकता सत्र भी आयोजित किया. लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज के नेतृत्व में नौसेना की टीम ने इस सत्र में ड्रोन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी. सत्र में अलग-अलग प्रकार के ड्रोन, उनसे उभरने वाले संभावित खतरों और ड्रोन रोधी प्रणालियों के बारे में बताया गया. इनमें रडार आधारित पहचान प्रणाली, रेडियो आवृत्ति के जरिए ड्रोन का पता लगाने वाली तकनीक और ड्रोन के संकेतों को बाधित करने वाली जैमिंग प्रणाली शामिल रही.
अभ्यास के दौरान हवाई क्षेत्र में संदिग्ध ड्रोन की मौजूदगी की स्थिति में सूचना साझा करने और तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया गया. ड्रोन जागरूकता सत्र में सुरक्षा कर्मियों को बदलती ड्रोन तकनीक और उससे जुड़े खतरों की जानकारी दी गई. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस पहल से हवाई अड्डे पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को ड्रोन से जुड़े संभावित खतरों को पहचानने और उनसे निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही, भारतीय नौसेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच समन्वय को भी और मजबूत किया गया.
–
जीसीबी