
नई दिल्ली, 30 सितंबर . दीपावली से पहले पटाखों के इस्तेमाल को लेकर Supreme Court ने अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, बल्कि धार्मिक भावनाओं और स्वास्थ्य-पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना होगा.
Supreme Court ने दीपावली से पहले पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वह धार्मिक भावनाओं और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाकर समाधान तलाशेगा.
सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा कि पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध से कुछ धार्मिक भावनाएं आहत होंगी. उन्होंने कहा, “हम पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन हम कहीं भी 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति भी नहीं देंगे, क्योंकि इससे बीमार, बुजुर्गों और बच्चों पर असर पड़ता है.”
जस्टिस सुंदरेश ने साफ कहा कि कोर्ट ऐसा समाधान निकालेगा जो सभी के लिए संतुलित हो. Supreme Court ने कहा कि वह ऐसा समाधान तलाशेगा जिसमें पटाखे चलाने के लिए समय-सीमा तय की जाए और यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति होगी. यानी किस तरह के पटाखे जलाए जा सकते हैं और किन पर रोक रहेगी, यह भी तय किया जाएगा.
कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और केंद्र सरकार को पटाखों में बेरियम की मौजूदगी की जांच के लिए और अधिक परीक्षण करने का समय दिया है.
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पटाखों के संयुक्त फायर टेस्ट करके उनका डेसिबल स्तर भी निर्धारित किया जाए. इससे यह पता चल सकेगा कि पटाखे कितना शोर पैदा करते हैं और उसका स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है.
Supreme Court ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की है. तब तक सीपीसीबी और केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट और टेस्ट के नतीजे पेश करने होंगे.
हर साल दीपावली के आसपास दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिसको लेकर पटाखों पर प्रतिबंध की मांग उठती रही है. लेकिन दूसरी तरफ धार्मिक भावनाओं का भी सवाल है. ऐसे में Supreme Court का यह संतुलित रुख अहम माना जा रहा है.
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वीकेयू/एएस