
पटना, 30 सितंबर . कैप्टन रितु कुमारी ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के इतिहास में पहली महिला मास्टर बनीं और मर्चेंट नेवी टैंकर, एमटी जग पवित्रा की कमान संभालने वाली बिहार की दूसरी महिला बनीं.
इस मौके पर कैप्टन रितु कुमारी ने कहा, “भारत में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया कंपनी में काफी महिलाएं आ गई हैं, लेकिन बिहार से मैं दूसरी हूं. विदेश जाने वाले जहाजों में मैं बिहार की पहली महिला कैप्टन हूं. यदि पूरे समुद्री क्षेत्र की बात करें तो इसमें महिलाओं की भागीदारी केवल दो प्रतिशत है. कैप्टन और मुख्य अधिकारी जैसे शीर्ष पदों पर और चीफ इंजीनियर, सेकंड इंजीनियर जैसे तकनीकी पदों पर अभी भी बहुत कम महिलाएं पहुंच पाई हैं.”
अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर उन्होंने कहा कि शुरुआत में मुझे इस क्षेत्र के बारे में जानकारी नहीं थी. बिहार में आज भी बहुत से लोगों को इसके बारे में पता नहीं है, तब तो जागरूकता बिल्कुल नहीं थी. मैं आनंद सर के यहां ट्यूशन करती थी, जहां सुपर-30 बैच चलता था. वहां सीनियर्स ने बताया कि आईआईटी के अलावा भी विकल्प है, जबकि उस समय लोग केवल आईआईटी के बारे में ही जानते थे. सीनियर्स ने बताया कि यदि आईआईटी में रैंक पीछे भी आती है तो यह एक विकल्प है, इसका अलग से फॉर्म भरना होता है, और कोई अलग परीक्षा नहीं देनी पड़ती, चयन आईआईटी के परिणाम से ही होता है. वहीं से मेरा चयन हुआ.
कैप्टन रितू ने कहा कि उस समय जागरूकता कम थी, इसलिए उनका चयन आईआईटी के माध्यम से हुआ. वह बहुत खुश थीं. काउंसलिंग के लिए गई तो आईआईटी के जरिए तीन कॉलेजों में दाखिला होता था, दो मुंबई में और एक कोलकाता में. वह काउंसलिंग के लिए गईं, तब भी महिला उम्मीदवार के तौर पर उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी. उन्होंने केवल यह देखा कि मुंबई में रहने की इच्छा थी और टीएस चाणक्य मुंबई में था, जो बीएससी नॉटिकल साइंस का तीन साल का कोर्स कराता था.
उन्होंने कहा कि मैंने सोचा कि पहले सभी दोस्त बीटेक कर रहे हैं जिसमें चार साल लगते हैं, मेडिकल में भी समय लगता है. वहां पढ़ाई कम और अतिरिक्त गतिविधियां ज्यादा थीं. सुबह पीटी, दिन भर खेल, स्विमिंग की सुविधा थी, जो मैंने पहले कभी देखी भी नहीं थी. मैं रोज सुबह-शाम स्विमिंग के लिए जाती थी. इसके अलावा कई तरह के खेल, क्विज, नाटक जैसी गतिविधियां होती रहती थीं, जो मैं अपने स्कूल नवोदय विद्यालय, राजगीर में भी करती रही हूं.
कैप्टन रितु ने कहा कि मैं वहां इन गतिविधियों में बहुत सक्रिय रहती थी, कार्यक्रमों के आयोजन में हिस्सा लेती थी. मैं स्कूल कैप्टन भी रही हूं. मुझे लगा कि यही वह करियर है जिसकी मैं तलाश कर रही थीं, जिसमें किताबी पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा और अतिरिक्त गतिविधियां करने को मिलेंगी. यह उनके लिए अच्छा रहा. थोड़ी रैगिंग भी हुई, लेकिन उन्होंने उसका भी आनंद लिया. फिर तीन साल की पढ़ाई पूरी हुई और उन्होंने अपने पहले जहाज पर नौकरी शुरू की.
उन्होंने बताया कि वह नाव के जरिए जहाज पर गईं. जब उन्होंने नाव से जहाज को देखा तो वह विशालकाय था; वह एक टैंकर जहाज था, और मैंने अपने पूरे करियर में टैंकर जहाजों पर ही काम किया है.
कैप्टन रितु ने कहा कि जहाज पर चढ़ते समय थोड़ी घबराहट भी हुई. जहाज पर पहुंचने के बाद लगा कि चलो, अब शुरुआत करनी है. उस समय यही सोच थी कि जहां भी जाऊंगी, अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी. कॉलेज में गईं, तब भी और पहला जहाज जॉइन किया, तब भी यही सोचा कि सबसे बेहतर बनना है. उस समय महिला होने को लेकर मन में ऐसा कोई भेदभाव नहीं था.
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केके/डीकेपी