
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर . दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पाकिस्तान उच्चायोग के एक अधिकारी के लिए कथित रूप से जासूसी करने के आरोपी हबीब उर रहमान को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया. जासूसी के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अपना फैसला दिया.
आरोपी हबीब उर रहमान कई बीमारियों से पीड़ित है. उसे मेडिकल आधार पर पहले जमानत मिल चुकी थी. इसके बाद आरोपी ने अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन किया. हालांकि, शुक्रवार को हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया.
हाईकोर्ट ने हबीब उर रहमान की मेडिकल स्थिति का ध्यान रखते हुए अधिकारियों को जेल में उसे जरूरी मेडिकल जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह, फिजियोथेरेपी और उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. हाईकोर्ट ने एम्स की रिपोर्ट का भी जिक्र किया और पाया कि रहमान को जेल में जरूरी मेडिकल इलाज दिया जा सकता है.
रहमान के वकील ने तर्क दिया कि सिर्फ आरोपों की गंभीरता के आधार पर जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि गोपनीय दस्तावेज पहले से ही कोर्ट के कब्जे में हैं, इसलिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना न के बराबर है.
कोर्ट ने माना कि रहमान जेल में तीन साल से अधिक समय बिता चुका है. कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी आपराधिक आरोप की गंभीरता के आधार पर किसी व्यक्ति को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब मुकदमे के उचित समय में पूरा होने की संभावना न हो. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस मामले की परिस्थितियां अलग हैं, क्योंकि ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय किए जा चुके हैं और अभियोजन पक्ष ने अपने सबूत पेश करना शुरू कर दिया है.
हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत देने पर विचार करते समय यह एक अहम पहलू है, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके आधार पर मुकदमे की कार्यवाही की गति को देखते हुए जमानत दी जा सके.
बता दें कि आरोपी हबीब उर रहमान के पास से कथित तौर पर सैन्य प्रशिक्षण से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज और ‘गोपनीय’ सामग्री मिली थी. उस पर पाकिस्तान हाई कमीशन के अधिकारी तक सैन्य सूचनाएं पहुंचाने के लिए बिचौलिए के तौर पर काम करने का आरोप है. हबीब के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत एफआईआर हुई और उसे साल 2021 में गिरफ्तार कर लिया गया.
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डीसीएच/