दिल्ली में कांग्रेस की रैली से 10 हजार करोड़ के कारोबार पर खतरा: सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर . दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और फैक्ट्री मालिकों की चिंताएं बढ़ गई हैं. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने या इसका स्थान बदलने की अपील की है. उन्होंने कहा कि रैली से उनका विरोध नहीं है, लेकिन त्योहार से ठीक पहले इसकी तारीख और जगह को लेकर व्यापारियों में चिंता है. इस रैली के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है और कारोबार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बृजेश गोयल ने कहा कि आयोजकों की ओर से रैली में करीब 10 लाख लोगों के आने की बात कही जा रही है. इतनी बड़ी संख्या में लोगों को लाने के लिए लगभग 15 से 20 हजार बसों, टेम्पो और अन्य वाहनों की जरूरत पड़ सकती है. रामलीला मैदान में 200 बसों की पार्किंग की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, ऐसे में हजारों वाहन पुरानी और मध्य दिल्ली में पहुंचेंगे तो यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ेगा. इससे जाम और लॉकडाउन जैसी स्थिति बन सकती है. 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए सीटीआई चेयरमैन ने कहा कि उस दौरान करीब पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी से मध्य दिल्ली में जाम लग गया था और लगभग 20 बाजार बंद हो गए थे. इस बार रैली दिवाली के प्रमुख खरीदारी वाले दिनों के आसपास हो रही है. छह नवंबर को धनतेरस और आठ नवंबर को दिवाली है. ऐसे में त्योहार से चार दिन पहले इतनी बड़ी रैली होने से बाजारों की गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है.

गोयल ने कहा कि रामलीला मैदान के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में लगभग 20 ऐतिहासिक बाजार हैं, जहां प्रतिदिन 10 से 12 हजार करोड़ रुपए तक का कारोबार होता है. उन्होंने जामा मस्जिद, कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, खारी बावली, सदर बाजार, नया बाजार, अजमेरी गेट, करोल बाग, गफ्फार मार्केट, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, दरियागंज और मीना बाजार सहित कई बाजारों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग स्तर पर रोजाना करोड़ों रुपए का कारोबार होता है. यदि एक या दो दिन बाजार बंद रहते हैं तो व्यापार को कम से कम 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है.

बृजेश गोयल ने बताया कि नरेला, बवाना, मंगोलपुरी, उद्योग नगर और पीरागढ़ी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना करीब 500 छोटे टेम्पो और टाटा एस वाहन बाजारों में माल पहुंचाते हैं. इसके अलावा लगभग तीन हजार वाहन इन बाजारों से एनसीआर और देश के दूसरे हिस्सों में सामान लेकर जाते हैं. 31 अक्टूबर की दोपहर से ही रैली में शामिल होने वाले वाहनों के आने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में ट्रांसपोर्टर असमंजस में हैं कि वे 31 अक्टूबर के लिए माल की बुकिंग लें या नहीं. 31 अक्टूबर और 1 नवंबर, दोनों दिनों को लेकर कारोबारियों में चिंता है. यदि वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है तो माल की लोडिंग-अनलोडिंग रुक सकती है. इससे धनतेरस और दिवाली के लिए आने वाला सामान बाजारों तक नहीं पहुंच पाएगा.

सीटीआई चेयरमैन ने कहा कि व्यापारियों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है. विभिन्न बाजारों की एसोसिएशन पत्र लिखकर और वीडियो संदेश जारी कर अपनी चिंता जाहिर कर रही हैं. व्यापारी रैली की तारीख या स्थान बदलने का अनुरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि दिवाली सभी समुदायों का बड़ा त्योहार है. हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोग इसे उत्साह से मनाते हैं. उन्होंने चिंता जताई कि रैली के कारण बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ तो व्यापारियों के लिए त्योहार का समय मुश्किल हो सकता है.

बृजेश गोयल ने यह स्पष्ट किया कि व्यापारियों को रैली से कोई आपत्ति नहीं है. उनका अनुरोध केवल इतना है कि इसे दिवाली के बाद आयोजित किया जाए या किसी दूसरे स्थान पर कराया जाए. उन्होंने राहुल गांधी के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि वे नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान चलाने की बात करते हैं, इसलिए व्यापारियों की मोहब्बत की दुकानें भी चलती रहनी चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से अपील की कि व्यापारियों को दिवाली के दौरान शांतिपूर्वक कारोबार करने का अवसर दिया जाए, ताकि बाजार खुले रहें और लोग प्रेम तथा उत्साह के साथ त्योहार मना सकें.

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पीएसके