देहरादून में राष्ट्रीय महिला आयोग की जनसुनवाई, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण से जुड़े मामले आए सामने

देहरादून, 30 अक्टूबर . राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने देहरादून में महिलाओं की समस्याओं और शिकायतों को सुनने के लिए जनसुनवाई की. इस दौरान घरेलू हिंसा, बच्चों की पढ़ाई, भरण-पोषण, लिव-इन रिलेशनशिप, ब्रीच ऑफ ट्रस्ट, मारपीट और अन्य तरह की हिंसा से जुड़े मामले सामने आए. आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि जनसुनवाई में कुल 27 मामलों की सुनवाई की गई. इनमें से कई मामलों का मौके पर समाधान किया गया, जबकि जिन मामलों में तत्काल कार्रवाई की जरूरत थी, उनके लिए संबंधित व्यवस्थाओं को निर्देश दिए गए.

विजया रहाटकर ने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से उत्तराखंड में देहरादून के अंदर यह जनसुनवाई आयोजित की गई. इसके बाद आयोग का यहां दो दिवसीय कार्यक्रम भी प्रस्तावित है. जनसुनवाई के दौरान महिलाओं ने अपनी समस्याएं और उनके सामने आ रही अड़चनों को आयोग के सामने रखा. आयोग ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा.

आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि सुनवाई के दौरान सबसे अधिक शिकायतें घरेलू हिंसा से संबंधित थीं. महिलाओं ने केवल घरेलू हिंसा ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी दूसरी परेशानियों को भी सामने रखा. कई महिलाओं की शिकायत थी कि उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हो रही है और उन्हें बच्चों के भरण-पोषण के लिए आवश्यक सहायता नहीं मिल रही है. ऐसे मामलों में परिवार और बच्चों से जुड़े सवाल भी उठाए गए. जनसुनवाई में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामले भी सामने आए. इसके अलावा, कई महिलाओं ने ब्रीच ऑफ ट्रस्ट से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं. कुछ मामलों में सिविल प्रकृति के भी थे. वहीं, मारपीट और हिंसा से जुड़ी शिकायतों को भी आयोग के सामने रखा गया.

उन्होंने कहा कि महिलाओं की समस्याएं अलग-अलग प्रकार की थीं और हर मामले में उनकी बात सुनकर समाधान की दिशा में प्रयास किया गया. आयोग ने शिकायतों की प्रकृति के अनुसार संबंधित पक्षों और व्यवस्थाओं को कार्रवाई के लिए कहा.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि जनसुनवाई में आए अनेक मामलों का समाधान किया जा चुका है. जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव नहीं था, उनमें संबंधित व्यवस्थाओं को तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. आयोग का उद्देश्य महिलाओं की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान के लिए जरूरी कदम उठाना है.

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पीएसके