
तवांग, 31 अक्टूबर . भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के तवांग पहुंचे थे. इस दौरान वहां सैकड़ों श्रद्धालु और स्थानीय निवासी मौजूद थे. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी वहां उपस्थित रहे.
केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “बौद्ध आध्यात्मिकता के सबसे सम्मानित केंद्रों में से एक, ऐतिहासिक तवांग मठ में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के दर्शन करने का सौभाग्य मिला. मैंने प्रार्थना की और सभी के लिए शांति, सद्भाव और कल्याण का आशीर्वाद मांगा. भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत और उसकी चिरंतन परंपराओं के बीच यह एक अत्यंत विनम्र और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने वाला अनुभव रहा.”
से बातचीत करते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए आज का दिन अत्यंत सौभाग्य का है. भगवान बुद्ध का अस्थि अवशेषों का यहां पहुंचनने पर और अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हुआ है. मेरी ओर से सभी को इसके लिए बधाई. मान्यता है कि भगवान बुद्ध स्वर्ग से धरती पर लौटते हैं.”
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, “आज का दिन काफी महत्वपूर्ण है. अरुणाचल प्रदेश की ओर से मैं प्रधानमंत्री, संस्कृति मंत्री को धन्यवाद देते हैं. तीन जिलों में कार्यक्रम रखा गया है. हम बौद्ध लोगों का मानना है कि स्वयं भगवान बुद्ध हम लोगों के प्रदेश में पधारे हुए हैं. हम प्रार्थना करते हैं कि जो भी कार्यक्रम में शामिल हों, उसका जीवन खुशमय रहे. बुद्ध की परंपरा केवल धर्म नहीं, यह जीवन जीने की पद्धति है.”
बता दें कि बुद्ध के पवित्र अवशेष 13 साल बाद अरुणाचल प्रदेश लौटे हैं. इस बार, मध्य क्षेत्र के नामसाई जाने से पहले, इन्हें पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश के तवांग और बोमडिला ले जाया जाएगा. यह यात्रा राज्य के बौद्ध समुदाय के लिए बहुत बड़ा धार्मिक महत्व रखती है.
बीते दिन केंद्रीय राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने से कहा था, “जब भी आप पूर्वोत्तर (नॉर्थईस्ट) जाते हैं, तो आपको हमेशा कुछ नया अनुभव मिलता है. मैं एक धार्मिक, बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हूं. मैं ईश्वर से डरता नहीं हूं, बल्कि उनसे प्रेम करता हूं. इसलिए, अगर हम ईश्वर की तुलना प्रकृति के तत्वों या मिट्टी के उन तत्वों से करें, जो हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन को बनाए रखने में मदद करते हैं, और हमारे विकास की प्रक्रिया में सहायक होते हैं, तो ‘प्रकृति मां’ (मदर नेचर) को हमारा साथ देना ही होगा.”
मेघालय के मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने कहा था, “यह इस इलाके के सबसे बड़े मठों में से एक है. इसलिए मेरी इसे देखने में दिलचस्पी थी. मैंने लद्दाख और सिक्किम में भी कुछ मठ देखे हैं. और चूंकि लोगों ने मुझे बताया कि यह इस इलाके के सबसे बड़े मठों में से एक है, इसलिए मेरी दिलचस्पी हुई और मैं यहां आया और मैंने देखा कि यह कैसा है.”
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एसडी/पीएम