बांग्लादेश: शेख हसीना की वापसी से पहले बीएनपी करेगी राजनीतिक मंथन, 40 से अधिक दलों से की जाएगी बातचीत!

नई दिल्ली, 5 नवंबर . बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) 2024 में हुए उन राजनीतिक दलों से बातचीत की योजना बना रही है, जिन्होंने तत्कालीन मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन में हिस्सा लिया था.

इस पहल का उद्देश्य अवामी लीग विरोधी दलों के बीच एकता बनाए रखना बताया जा रहा है. यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के निर्वासन से लौटने की संभावना जताई जा रही है.

बांग्लादेश के समाचार पत्र द बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, अवामी लीग सरकार के पतन का कारण बने आंदोलन में शामिल 40 से अधिक दलों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच यह पहल की जा रही है.

यह बैठक नवंबर के अंत या दिसंबर में हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि खासकर राष्ट्रीय चुनाव से पहले और बाद में कई मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं, जिससे दलों के बीच दूरी भी बढ़ी है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन से जुड़े दलों को आमंत्रित नहीं करेगी.

हालिया आम चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाली जमात-ए-इस्लामी इस समय बांग्लादेश संसद में विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रही है.

संभावित वार्ता में बीएनपी के 31 सूत्रीय सुधार एजेंडा, संवैधानिक बदलाव, जुलाई चार्टर को लागू करने, स्थानीय निकाय चुनावों की योजना और व्यापक राजनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.

दूसरी ओर, कभी बांग्लादेश की सबसे प्रभावशाली पार्टी रही अवामी लीग को 2024 के आंदोलन के बाद चुनावों में भाग लेने से रोक दिया गया था.

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वह दिसंबर में देश लौट सकती हैं, जबकि उनके खिलाफ मौत की सजा और कई अन्य कानूनी मामले लंबित हैं. ये मामले सत्ता से हटाए जाने और भारत में निर्वासन के बाद दर्ज हुए थे.

हसीना ने कई बार वर्चुअल माध्यम से मीडिया से बात करते हुए कहा है कि वह अन्य वरिष्ठ अवामी लीग नेताओं के साथ बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत में आत्मसमर्पण करेंगी. उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रेरणा से लगाए गए हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हसीना लौटती हैं तो यह बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. इससे प्रतिबंधित अवामी लीग के भविष्य, सरकार की जवाबदेही संबंधी मुहिम और देश की राजनीतिक स्थिरता को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है.

इसी पृष्ठभूमि में बीएनपी की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. पार्टी का मानना है कि सहयोगी दलों के साथ बातचीत कर मतभेद दूर करना जरूरी है, ताकि अवामी लीग विरोधी खेमे में बिखराव न हो.

बीएनपी का आरोप है कि अवामी लीग अब भी साजिशें कर रही है और जमात भी इसमें शामिल है.

दिलचस्प बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी अतीत में कभी बीएनपी तो कभी अवामी लीग के साथ सत्ता में साझेदार रही है, लेकिन हाल के वर्षों में उसने अपना अलग राजनीतिक रास्ता चुना है.

इस बीच, शेख हसीना की संभावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गई है.

एक पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि शेख हसीना की वापसी को लेकर बांग्लादेश में अलग-अलग राय हैं. जहां अवामी लीग नेताओं को उनकी वापसी पर पूरा भरोसा है, वहीं बीएनपी सरकार को संदेह है कि हसीना अपनी इच्छा से लौटेंगी. सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार, हसीना के लिए प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) और उसके बाद फांसी ही एकमात्र रास्ता है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हसीना लौट सकती हैं, लेकिन इसके लिए पहले सरकार के साथ बातचीत कर उनकी सुरक्षा और अपील के अधिकार जैसी शर्तों पर सहमति बननी होगी.

दूसरे विशेषज्ञों का मानना है कि बिना अपील के सीधे फांसी की बात कानूनी रूप से कम और हसीना को लौटने से रोकने की रणनीति ज्यादा लगती है.

हालांकि, यदि हसीना देश लौटती हैं तो सरकार क्या कदम उठाएगी, इसका कोई आधिकारिक रोडमैप अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. फिर भी, लगातार प्रत्यर्पण मांग, जारी कानूनी कार्रवाई और बढ़ती राजनीतिक बहस से संकेत मिलता है कि सरकारी संस्थाएं उनकी संभावित वापसी की तैयारी कर रही हैं.

आने वाले कुछ सप्ताह बांग्लादेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. एक ओर बीएनपी अपने सहयोगियों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है, दूसरी ओर जमात अपना अलग राजनीतिक आधार मजबूत कर रही है, जबकि शेख हसीना कानूनी और राजनीतिक जोखिमों के बावजूद देश लौटने पर अड़ी हुई हैं.

–

एएमटी/डीकेपी