इलाहाबाद हाईकोर्ट की एनएचआरसी पर सख्त टिप्पणी, मदरसों की जांच को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 30 अप्रैल . इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी टिप्पणी की है. न्यायालय ने आश्चर्य जताया कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि अन्य गंभीर मानवाधिकार मुद्दों पर उसकी सक्रियता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए गए हैं.

कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है. इस बीच आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने दिल्ली में समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच पर रोक लगी हुई है और यह जरूरी है कि जांच पूरी होने दी जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके.

प्रियंक कानूनगो ने हाई कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायालय ने एक मामले में यह भी कहा था कि आयोग कथित लिंचिंग जैसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता, जबकि मदरसों से जुड़े मामलों में सक्रियता दिखा रहा है. इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग को जो शिकायत प्राप्त हुई थी, उसमें गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था.

उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, जब अधिकांश संस्थान बंद थे, उस समय कथित रूप से 308 लोगों की नियुक्ति धोखाधड़ी से की गई. यह मामला बच्चों के शिक्षा के अधिकार और संस्थागत पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए आयोग ने इसे गंभीरता से लिया.

कानूनगो ने यह भी कहा कि यदि जांच के बीच में ही रोक लगा दी जाती है, तो आम जनता को अपने अधिकारों और संभावित अनियमितताओं के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाएगी. उन्होंने जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने पर जोर दिया.

वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद न्यायपालिका और मानवाधिकार आयोग की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. जहां एक ओर कोर्ट ने आयोग की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं, वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कहना है कि वह प्राप्त शिकायतों के आधार पर कार्रवाई कर रहा है. अब सभी की नजर आने वाली जांच रिपोर्ट और अदालत की आगे की सुनवाई पर टिकी है, जिससे इस विवाद पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

एसएके/पीएम