
तिरुवनंतपुरम, 16 मई . केरल की राजनीति में कभी अजेय माने जाने वाले सीपीआई (एम) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अब अपनी ही पार्टी के भीतर बड़े विरोध का सामना कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट की करारी हार के बाद पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. एक समय 140 सदस्यीय विधानसभा में 99 सीटों पर कब्जा रखने वाला लेफ्ट फ्रंट अब घटकर सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया है. इस हार ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
करीब तीन दशकों तक पिनाराई विजयन को केरल में सीपीआई (एम) का सबसे मजबूत और प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा. 1996 में ई.के. नयनार सरकार में मंत्री बनने और 1998 में पार्टी के राज्य सचिव की जिम्मेदारी संभालने के बाद पिनाराई विजयन ने संगठन पर मजबूत पकड़ बना ली थी. उनकी कार्यशैली को लेकर पार्टी में खुलकर सवाल उठाने की हिम्मत बहुत कम लोग करते थे.
लेकिन अब हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं. चुनावी हार के बाद पहले पोलित ब्यूरो में और फिर राज्य समिति की बैठकों में पिनाराई विजयन और राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठे. मामला अब जिला स्तर तक पहुंच चुका है. पथानामथिट्टा और कन्नूर जिला सचिवालय की बैठकों में दोनों नेताओं के फैसलों और नेतृत्व शैली की आलोचना हुई.
पथानामथिट्टा में नेताओं ने विजयन को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर ही सवाल खड़े कर दिए. उनका कहना था कि उम्र सीमा में जो छूट दी गई थी, वह मुख्यमंत्री बने रहने के लिए थी, न कि इतनी बड़ी हार के बाद भी नेतृत्व संभालने के लिए. बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यशैली पर भी निशाना साधा गया. आरोप लगाया गया कि पिछले 10 वर्षों में आम कार्यकर्ताओं को पार्टी और सरकार से दूर कर दिया गया.
कन्नूर, जिसे पिनाराई विजयन का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है, वहां भी नेताओं ने कहा कि पार्टी जनता का मूड समझने में नाकाम रही. चुनाव प्रचार के दौरान पिनाराई विजयन के बयान और उनकी शैली पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुई.
एम.वी. गोविंदन भी दबाव में हैं. पार्टी के अंदर उन पर संगठन से ज्यादा निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देने के आरोप लग रहे हैं. उनकी पत्नी की हार ने भी उनकी स्थिति कमजोर कर दी है.
अब पार्टी के भीतर विशेष प्लेनम बुलाने की मांग तेज हो रही है. सीपीआई (एम) के सामने सिर्फ चुनावी हार नहीं, बल्कि नेतृत्व का गहरा संकट खड़ा हो गया है. पहली बार पिनाराई विजयन और गोविंदन अपनी ही पार्टी में राजनीतिक रूप से कमजोर नजर आ रहे हैं.
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वीकेयू/एएस