
नई दिल्ली, 19 मई . राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े कट्टरपंथ और भर्ती मामले में एक मुख्य आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.
बेंगलुरु स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र निवासी हमराज वर्शीद शेख पर 63 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है. आरोपी ने अप्रैल 2026 में शुरू हुए ट्रायल के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.
एनआईए के अनुसार, आरोपी को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है. यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज किया गया था.
जांच एजेंसी ने अक्टूबर 2023 में हमराज शेख और उसके सहयोगी मोहम्मद आरिफ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. मोहम्मद आरिफ के खिलाफ फिलहाल ट्रायल जारी है.
एनआईए जांच में सामने आया कि हमराज शेख वर्ष 2019 से 2022 के बीच सऊदी अरब में रहने के दौरान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संपर्कों के जरिए तालिबान और टीटीपी की विचारधारा से कट्टरपंथी बना.
जांच में यह भी पता चला कि इंस्टाग्राम अकाउंट ‘कश्मीर पेजेस’ के जरिए लोगों को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित किया जा रहा था.
एनआईए के अनुसार, भारत लौटने के बाद हमराज ने अपने साथी आरिफ के साथ मिलकर कमजोर और भटके हुए युवाओं की पहचान कर उन्हें तालिबान और टीटीपी की आतंकी विचारधारा से जोड़ने की साजिश रची.
जांच एजेंसी ने बताया कि दोनों आरोपियों ने एक आतंकी गिरोह भी बनाया था, जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान जाकर टीटीपी में शामिल होना और भारत के खिलाफ जिहाद तथा युद्ध छेड़ना था.
वहीं, इस बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सोमवार को बब्बर खालसा इंटरनेशनल और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आतंकी साजिश मामले में 23वें आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. एनआईए ने नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में दाखिल अपनी छठी चार्जशीट में आरोपी अर्जित कुमार उर्फ अजीत पर भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं.
एनआईए के बयान के अनुसार, यह मामला लॉरेंस बिश्नोई गैंग और प्रतिबंधित संगठन बीकेआई द्वारा भारत में आतंक फैलाने की साजिश से जुड़ा है. अर्जित कुमार इस मामले की चार्जशीट में 23वां आरोपी है.
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एएमटी/डीकेपी