
मुंबई, 21 मई . मुंबई साइबर पुलिस ने डिजिटल ठगी के खिलाफ अपनी मुहिम में एक और बड़ी सफलता हासिल की है. जनवरी 2026 से मई 2026 के पहले 19 दिनों तक 1930 साइबर हेल्पलाइन और क्राइम ब्रांच की तेज कार्रवाई से 101.39 करोड़ रुपए से अधिक की राशि को फ्रीज कर नागरिकों की बचत की गई है.
मुंबई पुलिस के अनुसार, इस अवधि में हेल्पलाइन पर कुल 2,55,092 कॉल्स दर्ज की गईं. इनमें से 30,302 मामलों में सफलतापूर्वक ठगी की रकम होल्ड कर ली गई. यानी हर चार में से एक मामले में पुलिस समय रहते पैसे को बचाने में कामयाब रही. सफलता दर करीब 25.68 प्रतिशत रही.
मुंबई साइबर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “1930 हेल्पलाइन अब मुंबईवासियों के लिए डिजिटल सुरक्षा का मजबूत कवच बन चुकी है. शिकायत मिलते ही हम बैंक, पेमेंट गेटवे और संबंधित एजेंसियों के साथ तुरंत समन्वय स्थापित करते हैं. राष्ट्रीय स्तर पर नोडल अधिकारियों से संपर्क कर संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया जाता है, ताकि अपराधी पैसा ट्रांसफर न कर सकें. यह त्वरित प्रतिक्रिया ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है.”
मुख्य रूप से शेयर ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, फर्जी जॉब ऑफर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, फिशिंग और ओटीपी-आधारित ठगी जैसे मामलों में शिकायतें आ रही हैं. अधिकारी तुरंत संबंधित बैंक या वॉलेट से संपर्क कर राशि रोक रहे हैं.
चार वर्षों का आंकड़ा और भी प्रभावशाली है. मई 2022 में शुरू हुई 1930 हेल्पलाइन ने अब तक कुल 491.57 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की राशि को बचाया है. यह आंकड़ा साबित करता है कि मुंबई पुलिस साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच एक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था खड़ी करने में सफल हो रही है.
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, निवेश का लालच या वित्तीय धोखाधड़ी दिखे तो तुरंत 1930 पर कॉल करें. अधिकारी मानते हैं कि साइबर फ्रॉड में समय सबसे महत्वपूर्ण कारक है. जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि ठगी गई रकम वापस मिल सके या फ्रीज हो सके.
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एससीएच