बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ पर Supreme Court सख्त, व्यापक विकास योजना बनाने के निर्देश

नई दिल्ली, 26 मई . Supreme Court ने वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी महाराज मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने मंगलवार को हुई सुनवाई में कहा कि अब पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ने के बजाय कुछ अलग हटकर सोचने की जरूरत है, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित की जा सके.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र के लिए एक व्यापक विकास योजना तैयार करने पर जोर दिया.

अदालत ने कहा कि मंदिर तक पहुंचने वाली संकरी गलियां और सीमित स्थान भविष्य में बड़ी समस्याएं बन सकती हैं. ऐसे में भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है.

Supreme Court ने उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर प्रबंधन समिति को निर्देश दिया कि वे मिलकर एक विस्तृत विकास रिपोर्ट तैयार करें. इसके साथ ही मंदिर के आसपास की सड़कों को चौड़ा किया जाए, सार्वजनिक परिवहन की बेहतर व्यवस्था हो, श्रद्धालुओं के लिए आश्रय स्थल बनाए जाएं तथा पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. इसके अलावा आपातकालीन निकास मार्ग, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया.

वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को बताया कि मंदिर प्रबंधन समिति में चार गोस्वामियों की नियुक्ति निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत की गई है. इसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे और दोनों प्रमुख समूहों, शयन भोग और राज भोग, का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु साक्षात्कार आयोजित किए गए.

Supreme Court ने समिति में शयन भोग समूह से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी तथा राज भोग समूह से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी को शामिल किए जाने को नोट कर लिया. कोर्ट ने कहा कि ये सदस्य मंदिर की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं, पूजा-पद्धति और दैनिक संचालन को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देंगे.

कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिर के खुलने और बंद होने के समय को लेकर भी समिति सुझाव दे सकती है. साथ ही मंदिर तक जाने वाले मार्गों पर अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

Supreme Court ने स्पष्ट किया कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के जरिए श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

एसएके/डीकेपी