
पटना, 27 मई . केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय बदलाव पर उच्चस्तरीय समिति गठित किए जाने के फैसले पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. बिहार के प्रमुख दलों ने बुधवार को इस कदम का स्वागत करते हुए अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई है.
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने से कहा, “यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है. जिन राज्यों में विपक्षी दलों का शासन रहा है, जैसे पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में वहां के कई जिलों की जनसांख्यिकी पूरी तरह बदल गई. आरोप है कि उनके शासन में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाया गया. अवैध घुसपैठ एक बड़ी समस्या बनी हुई है.”
सरावगी ने याद दिलाया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री ने बिना किसी चुनावी संदर्भ के बिहार का दौरा किया था और सीमावर्ती जिलों में तीन दिन बिताए थे. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल बिहार या बंगाल तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है.
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, “हाल के वर्षों में बांग्लादेश से सीमावर्ती जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ हुई है. कई जिलों की जनसांख्यिकीय बनावट बदल रही है, जो चिंता का विषय है. कुछ जगहों पर यह बदलाव लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है. गृह मंत्री ने भी चिंता जताई है कि विदेशों से घुसपैठिये आ रहे हैं और जनसांख्यिकीय स्वरूप बदल रहा है, जिससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो रही है.”
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी मुद्दे की गंभीरता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, “ऐसे तमाम लोग जिनके पास इस देश की नागरिकता नहीं है या वैध कागजात नहीं हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का कारण हैं. यह बेहद आवश्यक है कि संसाधनों का बंटवारा इस 140 करोड़ की आबादी वाले देश में सिर्फ भारतीयों के बीच हो. जो लोग यहां अवैध रूप से रह रहे हैं, उन्हें देश से बाहर जाना होगा.”
समिति के गठन को बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन भाजपा-जदयू ने सकारात्मक कदम बताया है. यह समिति अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और जनसांख्यिकीय असंतुलन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी.
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एससीएच/पीएम