गोल्ड न जीतने से निराश हूं, यह मेरा आखिरी एशियन गेम्स हो सकता है: अभय सिंह

नागोया, 27 सितंबर . एशियन गेम्स 2026 में रविवार को मेंस सिंगल्स स्क्वैश फाइनल में भारत के अभय सिंह को सिल्वर मेडल के साथ संतोष करना पड़ा. उन्हें फाइनल में मलेशिया के मौजूदा चैंपियन ईन यो एनजी ने 11-9, 11-5, 11-5 से शिकस्त दी. सिल्वर मेडल जीतने के बाद, भारत के अभय सिंह ने माना कि यह एशियन गेम्स में उनकी आखिरी मौजूदगी हो सकती है.

अभय अब टीम इवेंट पर ध्यान देंगे, जिसके बाद यूएस ओपन में नजर आएंगे. अभय ने ‘ ’ से ​​कहा, “कुछ कहा नहीं जा सकता; हो सकता है कि यह मेरा आखिरी इवेंट हो, या शायद नहीं. मैंने पहले गेम में काफी अच्छा खेला. हम दोनों के बीच कड़ी टक्कर थी.”

अभय, सौरव घोषाल के बाद एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाले स्क्वैश में दूसरे भारतीय पुरुष बने हैं. हालांकि, अभय गोल्ड मेडल के साथ मिलने वाला लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक का सीधा क्वालिफिकेशन स्पॉट हासिल नहीं कर सके.

अभय ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि फाइनल के नतीजे से निराश हैं. इसके साथ ही उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने के लिए ईन को सराहा.

अभय ने कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने दूसरे गेम में बेहतर स्क्वैश खेलना शुरू किया. उन्होंने गेंद को बहुत अच्छी जगहों पर रखा, बहुत साफ-सुथरा स्क्वैश खेला और अच्छी तरह से मूव किया. सारा श्रेय उन्हें जाता है. आज वह बेहतर एथलीट थे.”

हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने जोर देकर कहा कि हार भले ही दुखद थी, लेकिन सिल्वर मेडल उन्हें निराश नहीं करेगा. उन्होंने कहा, “बड़े नजरिए से देखूं तो मैं निराश नहीं हूं. जाहिर है, आज रात के नतीजे से मैं निराश हूं. बहुत से लोगों ने मुझ पर बहुत मेहनत की है. मैं बस कुछ वापस देना चाहता था, अच्छा करना चाहता था. चाहे मेरी टीम हो, सरकार हो जो हमें स्पॉन्सर करती है, या सभी स्पॉन्सर हों—हमें जो भी मदद, समर्थन और प्यार मिलता है, उसके लिए आभारी हूं. मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया, लेकिन जब आप थोड़ा पीछे रह जाते हैं, तो थोड़ा दुख तो होता ही है.”

अभय इस बात के लिए भी शुक्रगुजार थे कि उनके माता-पिता नागोया में मौजूद थे; जिनकी मौजूदगी ने उनके लिए इस हफ्ते को खास बना दिया. अभय ने कहा, “मेरे माता-पिता बहुत अच्छे हैं. वे ज्यादा कुछ नहीं कहते. उन्हें पता होता है कि कब और क्या कहना है. उनका यहां होना अच्छा रहा. वे पिछले एशियन गेम्स में नहीं आ पाए थे, लेकिन मुझे खुशी है कि वे इस हफ्ते का खेल देख पाए.”

28 वर्षीय अभय ने यह मेडल अपने सपोर्ट सिस्टम को भी समर्पित करते हुए कहा, “यह मेडल असल में सभी के लिए है. मुझे नहीं लगता कि किसी एक को दूसरों से ज्यादा श्रेय मिलना चाहिए. मैं कई ऐसे लोगों के साथ बहुत करीब से काम करता हूं, जो इस हफ्ते इंडियन सपोर्ट टीम का हिस्सा बनकर यहां आए हैं. माननीय प्रधानमंत्री ने भारतीय खेलों को बेहतर बनाया है. स्क्वॉश को मिलने वाला समर्थन अविश्वसनीय है. तमिलनाडु की मेरी राज्य सरकार ने मेरे साथ बहुत अच्छा बर्ताव किया है. यह मेडल उन सभी के लिए भी है.”

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आरएसजी