
काबुल, 30 जून . पिछले पांच महीनों में पाकिस्तानी हवाई हमलों में अफगानिस्तान के 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और बड़ी तादाद में आम अफगानी घायल हुए हैं. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में इन हमलों से हुए नुकसान का लेखा जोखा सामने रखा गया है.
अफगान मीडिया आउटलेट टोलो न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये हमले अफगानिस्तान के कई प्रांतों, खोस्त, पक्तिया, पक्तिका, कुनार, काबुल, नंगरहार और कंधार में किए गए, जिनका सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को हुआ है.
इन हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया गया, जिनमें लोगों के आवास, अस्पताल, स्कूल और विश्वविद्यालय शामिल हैं.
एक राजनीतिक विश्लेषक अख्तर मोहम्मद रसिख ने टोलो न्यूज से कहा, “पाकिस्तान की सेना, खुफिया एजेंसियां और राजनीतिक नेतृत्व अफगानिस्तान को अस्थिर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. इसका परिणाम अफगानों की मौत, देश में असुरक्षा, अफगानिस्तान को पाकिस्तान का प्रभाव क्षेत्र बनाने और डूरंड लाइन को आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित करने की कोशिश है.”
रिपोर्ट में इस वर्ष हुई कई बड़ी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें 21 फरवरी को पक्तिका, नंगरहार और खोस्त में हुए हवाई हमलों में 18 लोगों की मौत हुई, जिनमें 11 बच्चे शामिल थे.
इसके अलावा, 16 मार्च को काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए हमले में 400 से अधिक लोगों की मौत और 260 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया है.
27 अप्रैल को कुनार प्रांत स्थित सैयद जमालुद्दीन अफगानी विश्वविद्यालय पर हुए हमले में लगभग 30 छात्र और शिक्षक घायल हुए. वहीं 10 जून को खोस्त, कुनार और पक्तिका में हुए हवाई हमलों में 13 लोगों की मौत बताई गई.
इसके अलावा, 28 जून की रात पक्तिया, पक्तिका और कुनार में हुए हमलों में 36 नागरिकों की मौत और 163 लोगों के घायल होने की पुष्टि तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने की है.
एक सैन्य विश्लेषक सादिक शिनवारी ने टोलो न्यूज से कहा, “पाकिस्तान के लगातार हवाई हमले, जिसमें रविवार के हमले भी शामिल हैं, अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का स्पष्ट उल्लंघन हैं. इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों की मौत हुई है, और इनका कोई औचित्य नहीं है.”
कई विश्लेषकों ने पाकिस्तान के इन हमलों और कथित नागरिकों को निशाना बनाने को “युद्ध अपराध” बताया है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से जांच की मांग की है.
हालांकि इस्लामाबाद अक्सर अफगानिस्तान में उग्रवादी समूहों की मौजूदगी को सीमा पार हमलों का कारण बताता रहा है, रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के भीतर भी आईएसआईएस से जुड़े आतंकी ठिकाने सक्रिय हैं.
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केआर/