
छपरा, 1 अक्टूबर . बिहार के सारण जिले में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. मकेर प्रखंड में तटबंध टूटने से बड़ी मात्रा में पानी फैल गया है. इससे मकेर प्रखंड की सभी पंचायतें और अमनौर प्रखंड की कुछ पंचायतें प्रभावित हुई हैं. पानी का तेज बहाव परसा प्रखंड की ओर भी हो रहा है.
वहीं, बाढ़ का पानी कुछ स्थानों पर एनएच-722 पर चढ़ जाने से आवागमन और संपर्कता प्रभावित हुई है. जिला प्रशासन के अनुसार, बुधवार की शाम तक जिले की 18 पंचायतों के 48 गांव बाढ़ से प्रभावित थे. प्रभावित आबादी करीब 24,725 और लगभग 4,220 परिवार हैं. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है.
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधिकारी स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और स्थानीय लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहे हैं. जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि मकेर में तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से फैल रहा है. प्रभावित पंचायतों में नावें लगाई गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम लगातार जारी है. उन्होंने बताया कि कल रात से ही प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ की दो टीमों और एसडीआरएफ की एक टीम को लगाया गया है.
इसके अलावा एसडीआरएफ की करीब 40 सदस्यों वाली एक अतिरिक्त टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में लगाई गई है. पानापुर प्रखंड में भी एक स्थान पर तटबंध टूटने से तेजी से पानी फैल रहा है. यहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए एसडीआरएफ की दो टीमें लगाई गई हैं. प्रशासन के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों में 33 नावें और एक बोट एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं. पांच चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं. पशु चिकित्सा के लिए भी शिविर की व्यवस्था की गई है. एक राहत केंद्र में करीब 50 लोगों के रहने की व्यवस्था है.
बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों में सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं. बुधवार को 14 सामुदायिक रसोई के माध्यम से करीब 5,000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई. पानापुर में दो, तरैया में तीन, अमनौर में एक, मकेर में पांच और परसा में तीन सामुदायिक रसोई संचालित हैं.
प्रशासन ने आवश्यकता के अनुसार पंचायत स्तर पर भी सामुदायिक रसोई बढ़ाने की तैयारी की है. मकेर में जरूरतमंद परिवारों के बीच 950 पॉलिथीन शीट का वितरण किया जा चुका है. अन्य प्रभावित इलाकों में भी पॉलिथीन शीट उपलब्ध कराने के साथ पशुपालकों के लिए पशु चारे की व्यवस्था की जा रही है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं और जरूरत के अनुसार मेडिकल कैंप बढ़ाए जा रहे हैं. प्रशासन ने लोगों से पानी में अनावश्यक रूप से नहीं जाने तथा नदी और तटबंध के संवेदनशील क्षेत्रों में आवागमन से बचने की अपील की है.
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता सभी प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और उनके लिए भोजन, चिकित्सा तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. उन्होंने लोगों से प्रशासन और बचाव दलों का सहयोग करने की अपील की. प्रशासन के मुताबिक, जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है. आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव संसाधनों को और बढ़ाया जाएगा. राज्य सरकार के पशु विकास विभाग के सचिव और निदेशक भी प्रभावित क्षेत्र में कैंप कर प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश और सहयोग दे रहे हैं.
–
एमएनपी/एसके