
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर . Supreme Court ने गुरुवार को 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में मौत की सजा पाए अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की फांसी पर रोक लगा दी. कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था.
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और संदीप मेहता की विशेष पीठ ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ बरेलवी की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) की सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया. Supreme Court ने गुजरात सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका जवाब मांगा है.
अधिवक्ता आशुतोष ठाकुर के जरिए पेश हुए बरेलवी ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सिलसिलेवार बम विस्फोटों में उनकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था. सुनवाई के दौरान, अधिवक्ता आशुतोष ने दोषसिद्धि और मृत्युदंड को बरकरार रखने वाले निष्कर्षों को चुनौती दी. उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें पूरी तरह से कथित साजिश के आधार पर दोषी ठहराया गया था.
18 फरवरी, 2022 को मामले में 78 आरोपियों में से 49 को दोषी ठहराए जाने के बाद अहमदाबाद सेशंस कोर्ट ने बरेलवी समेत 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी. शेष 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि 29 लोगों को बरी कर दिया गया था.
बता दें कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में कई स्थानों पर धमाके हुए थे, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे.
इस मामले में व्यापक के आधार पर 35 एफआईआर दर्ज की गईं और 548 आरोपपत्र दाखिल किए गए. हजारों सबूतों और 1,163 गवाहों की जांच के बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला लगभग 7,000 पन्नों का था, जबकि मामले की केस फाइल (पेपर बुक) में लगभग 7.88 लाख पन्ने थे.
इस मामले के आरोपी देश के अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले थे, जिनमें गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और झारखंड शामिल थे. उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और शस्त्र अधिनियम समेत कई कानूनों के तहत मुकदमा चलाया गया.
सेशन कोर्ट की ओर से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया और 38 दोषियों के खिलाफ सजा के क्रियान्वयन की मांग की. फिलहाल, Supreme Court ने बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी किया है. साथ ही उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी है.
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