
चंडीगढ़, 20 जून . हरियाणा में एक तरफ जहां पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए सरकार आम जनता से पौधे लगाने की अपील कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ मोरनी इलाके के असरेवाली गांव में पेड़ों की कटाई कर दी गई. हैरानी वाली बात यह है कि एक दो पेड़ों की कटाई नहीं की गई बल्कि हजारों पेड़ काटे गए. इसे लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी विरोध जताया है.
इस पूरे मामले को लेकर वकील संजीव चौधरी ने से बातचीत की.
वकील संजीव चौधरी ने हरियाणा के पंचकूला जिले के संरक्षित वन क्षेत्रों में 3,500 से ज्यादा पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का आरोप लगाया और एक स्वतंत्र जांच की मांग की. साथ ही उन्होंने जांच के दौरान सस्पेंड किए गए वन अधिकारियों को बहाल किए जाने पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि यह मामला मोरनी इलाके का है, जहां असरेवाली गांव में सफेदा के लगभग 2,000 और खैर के 1,500 पेड़ काटे गए हैं. उन्होंने कहा कि जब यह मामला हरियाणा सरकार के संज्ञान में आया तो सरकार की ओर से तुरंत कार्रवाई भी गई, जो कि सराहनीय कार्य था.
वकील संजीव चौधरी ने कहा कि इस मामले में हरियाणा सरकार के मंत्री ने चार अधिकारियों को सस्पेंड किया था, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें उन्हीं पदों पर बहाल कर दिया गया. यह बात कुछ हद तक संदिग्ध है.
वकील संजीव चौधरी के अनुसार, अगर जो निलंबित अधिकारी हैं उन्हें बहाल कर दिया गया है तो निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती. ऐसा हमारा मानना है. साथ ही पेड़ों की कटाई का जो सिलसिला चल रहा है, उसे भी रोका नहीं जा सकेगा.
वकील ने सरकार से अपील की है कि जो इस तरह के अधिकारी हैं जो अपने कार्यों से सरकार की छवि खराब करते हैं, उन्हें इस इलाके में तैनात नहीं किया जाना चाहिए. उन्हें यहां पोस्टिंग न दी जाए. ऐसे अधिकारियों को पोस्टिंग दी जाए जो वन्यजीव और वातावरण को लेकर गंभीर हैं. ऐसे अधिकारियों को यहां पोस्टिंग दी जानी चाहिए.
मोरनी इलाके का जिक्र करते हुए वकील ने कहा कि यह इलाका पूरा वन्यजीव क्षेत्र है. चारों तरफ हरियाली है. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस इलाके की देखभाल ठीक ढंग से हो पाए. सीएम नायब सैनी का जिक्र करते हुए वकील ने कहा कि हम इस पूरे मामले को लेकर सीएम से मिलेंगे और ज्ञापन भी सौपेंगे. उन्होंने कहा कि एनजीटी में यह मामला पेंडिंग है.
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डीकेएम/वीसी