सिद्धिविनायक मंदिर में अनियमितताओं का आरोप, मनसे नेता बोले- राम मंदिर से ध्यान भटकाने की साजिश

मुंबई, 11 जुलाई . देशभर में मंदिरों में मिलने वाले चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता यशवंत किल्लेदार ने मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, दान व्यवस्था और प्रस्तावित सौंदर्यीकरण परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के बजाय सरकार राजनीतिक लाभ के लिए पुराने मुद्दों को सामने ला रही है.

यशवंत किल्लेदार ने से बातचीत में कहा कि देश में जिस प्रकार शासन चलाया जा रहा है, उससे विभिन्न संस्थाओं में भ्रष्टाचार बढ़ा है. राजनीतिक व्यवस्था को संचालित करने, चुनावी प्रबंधन और सत्ता बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर धन की आवश्यकता होती है, जिसके चलते भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है. इसका असर धार्मिक संस्थानों तक भी पहुंच गया है. भगवान के मंदिरों को भी इस कथित भ्रष्टाचार से अछूता नहीं छोड़ा गया है. राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवाद सामने आने के बाद उससे ध्यान हटाने के लिए अब वर्षों पुराने सिद्धिविनायक मंदिर के मामले को दोबारा उठाया जा रहा है. यह जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है.

उन्होंने दावा किया कि करीब छह महीने पहले सिद्धिविनायक मंदिर के कुछ कर्मचारी कथित चोरी करते हुए सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. पुलिस ने यह कार्रवाई केवल मीडिया और सोशल मीडिया में मामला उछलने के बाद की, जबकि पूरे मामले की गहन जांच नहीं की गई.

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा विपक्ष पर सिद्धिविनायक मंदिर मामले में चुप्पी साधने के आरोपों का जवाब देते हुए किल्लेदार ने कहा कि उन्होंने स्वयं लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले इस मुद्दे को उठाया था. उस समय राज्य के न्याय एवं विधि विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कर मंदिर ट्रस्ट के कामकाज की जांच की मांग की गई थी. जब शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को सार्वजनिक किया. इसके बाद यह मामला व्यापक रूप से चर्चा में आया. सरकार की ओर से जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार गंभीर थी तो उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई और अब इस मुद्दे को दोबारा क्यों उठाया जा रहा है.

मनसे नेता ने सिद्धिविनायक मंदिर के प्रस्तावित सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट पर भी सवाल उठाए. मंदिर ट्रस्ट आर्थिक रूप से बेहद सक्षम है और सामाजिक कार्यों के लिए अन्य संस्थाओं को भी करोड़ों रुपए का सहयोग देता रहा है. ऐसे में मुंबई महानगरपालिका के फंड से इतनी बड़ी राशि खर्च करने की आवश्यकता समझ से परे है. उन्होंने आरोप लगाया कि इतने छोटे क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान उचित नहीं लगता और इस परियोजना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

यशवंत किल्लेदार ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े कथित विवाद के बाद लोगों का ध्यान दूसरी ओर मोड़ने के लिए पुराने मामलों को सामने लाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जनता अब इस तरह की राजनीतिक रणनीतियों को समझने लगी है और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

पीएसके