अमेरिका ने डाला अड़ंगा, उसकी वजह से परमाणु बातचीत बिगड़ी : ईरान

तेहरान/न्यूयॉर्क, 23 मई . ईरान ने शनिवार को अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र में परमाणु बातचीत को बिगाड़ने का आरोप लगाया. तेहरान का कहना है कि उसकी ज्यादा सख्त मांगों की वजह से परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) को लेकर चल रही वार्ता खराब हो गई है.

ईरान के अनुसार, अमेरिका और उसके साथी देशों की वजह से एनपीटी समीक्षा सम्मेलन लगातार तीसरी बार बिना बेनतीजा खत्म हुई.

यूएन में ईरान के स्थायी मिशन ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए एक्स पर दी. एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, अमेरिका की अत्यधिक मांगों ने एनपीटी को पतन की ओर धकेल दिया है. अमेरिका और उसके सहयोगियों की बाधा डालने वाली नीतियों के कारण एनपीटी समीक्षा सम्मेलन लगातार तीसरी बार विफल रहा.” इसके साथ ही उन्होंने अपने पोस्ट में ईरान की चेतावनी का भी जिक्र किया. उन्होंने आगे लिखा: “परमाणु निरस्त्रीकरण के बिना एनपीटी भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती.”

रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस भाषा को लेकर था जिसे अमेरिका अंतिम दस्तावेज में शामिल करना चाहता था.

ईरान का स्पष्ट मानना है कि अमेरिका इस बैठक का इस्तेमाल उनके परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने के लिए कर रहा था. इसी वजह से बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. उनका मत है कि अगर बड़े देश खुद अपने परमाणु हथियार कम नहीं करेंगे, तो दुनिया को परमाणु हथियार मुक्त बनाने की बात सिर्फ छलावा बन कर रह जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र में परमाणु हथियारों को रोकने और दुनिया में शांति बनाए रखने को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था. सम्मेलन 27 अप्रैल को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुरू हुआ. इस बैठक में कई देशों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, देशों के बीच तनाव कम करना और दुनिया को परमाणु हथियारों के खतरे से सुरक्षित बनाना था.

प्रसारक एनएचके जापान के अनुसार, सम्मेलन के अध्यक्ष डो हंग वियत ने शुक्रवार की बैठक में कहा कि कोई आम सहमति नहीं बन पाई, जो बेहद खेदजनक है.

एनपीटी एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों का प्रसार रोकना, परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग करना है. 1968 में इस संधि पर हस्ताक्षर हुए थे और 5 मार्च 1970 को इसे लागू किया गया था. वहीं, 11 मई 1995 को इसे अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया था.

केआर/