
अमरावती, 30 अक्टूबर . आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत राज, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और वन मंत्री पवन कल्याण ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों की समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि मछुआरा समुदाय लंबे समय से विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है और उनकी आजीविका तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए जाने चाहिए.
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अधिकारियों को मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की संभावनाओं का अध्ययन करने और इस संबंध में उपयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने काकीनाडा जिले के अधिकारियों से तटीय मछुआरा समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए योजनाएं तैयार करने को कहा.
पवन कल्याण ने कहा कि वह दिवाली के बाद मछुआरा गांवों का दौरा करेंगे और वहां के लोगों की समस्याओं का स्वयं आकलन करेंगे. उपमुख्यमंत्री ने काकीनाडा जिला प्रशासन और तटीय गांवों के निवासियों के साथ वर्चुअल बैठक कर चक्रवात अर्नब के प्रभाव, राहत कार्यों की स्थिति और प्रभावित लोगों को दी जा रही सहायता की समीक्षा की.
इस दौरान जिला कलेक्टर ने तटीय गांवों के मछुआरों से चक्रवात से हुए नुकसान और राहत कार्यों के बारे में जानकारी ली. जिलेभर में चलाए गए राहत कार्यों की समीक्षा के बाद कलेक्टर ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दिशा-निर्देश दिए.
उपमुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर को विशेष रूप से उप्पाडा तटीय क्षेत्र में सुरक्षात्मक समुद्री दीवार (सी वॉल) के डिजाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए.
उन्होंने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को पहले भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर सुरक्षात्मक समुद्री दीवार को कोनापापेटा तक बढ़ाने के प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी दिलाने के प्रयास करने को भी कहा.
उप्पाडा-काकीनाडा बीच रोड चक्रवात से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है. इसे देखते हुए अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि स्थानीय तटीय आबादी की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं और इस संबंध में जरूरी प्रस्ताव तैयार किए जाएं.
पवन कल्याण ने काकीनाडा जिला प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि जिले की 92 तटीय बस्तियों से 10,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और 102 पुनर्वास केंद्रों में उन्हें आश्रय दिया गया. उन्होंने कहा कि चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए आवश्यक राहत कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहने चाहिए.
बैठक में बताया गया कि सुरदापेटा, मायापटनम, कोठापटनम और नायकार कॉलोनी के निवासियों को समुद्री पानी बस्तियों में घुसने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, हालांकि सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर जिला प्रशासन ने पानी पूरी तरह निकाल दिया, जिसके लिए उसकी सराहना की गई.
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि चक्रवात से मकानों, फसलों, नौकाओं, मछली पकड़ने के जाल और करघों को हुए नुकसान के आकलन का काम जल्द पूरा किया जाए. साथ ही सभी नुकसान का व्यापक मूल्यांकन तैयार कर उसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश भी दिए गए.
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एएमटी/वीसी