
नई दिल्ली, 31 जुलाई . भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को विपक्षी दलों पर सेना का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने शुक्रवार को समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि जब कभी देश की सेना का अपमान करने की बात आती है, तो कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल पीछे नहीं रहते हैं.
उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों ने देखा है कि कैसे इन लोगों ने एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों पर सवाल खड़े किए. कैसे ये लोग विदेशी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. आज हम देख सकते हैं कि कैसे इनके नेता सदन में झूठ बोलते हैं. झूठे आरोप लगाते हैं. यह सब नियमों के विरुद्ध है. इसलिए हमने नोटिस जारी किया है. रूल 2 और रूल 3 का हवाला देते हुए मैंने खुद नोटिस दिया है. यह दुर्भाग्य की बात है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर झूठे आरोप लगाते हैं. प्रियंका गांधी मीडिया को पालतू कह देती हैं. बाहर आकर राहुल गांधी मीडिया को भाजपा वालों का बताते हैं और पुलिस पर भी सवाल खड़ा करने से गुरेज नहीं करते हैं. यह परिवार पूरी तरह से अहंकार में डूबा हुआ है.
अनुराग ठाकुर ने बताया कि 12 साल तक सत्ता से बाहर रहने के बाद ये लोग कभी संवैधानिक संस्था पर सवाल खड़ा करने पर आमादा हो जाते हैं, तो कभी लोकसभा स्पीकर पर. इतना ही नहीं सदन में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए इडियट जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता है. इस तरह की कार्यपद्धति से यह साफ जाहिर हो रहा है कि अहंकार में गांधी परिवार डूबा हुआ है, जिसकी भारी कीमत कांग्रेस को चुकानी पड़ी है.
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद मामले को लेकर केंद्र सरकार को घेरा. हमारा एकमात्र मकसद यही है कि हम राम मंदिर चढ़ावा विवाद को देश की जनता तक पहुंचाने का काम करें. हम उन्हें बताएं कि कैसे भाजपा ने भगवान राम के चढ़ावे में घपला किया है और हम इस विषय को जनता तक हर सूरत में पहुंचाकर रहेंगे.
डिंपल यादव ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया. उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हमारे लिए अभी सबसे अहम मुद्दा 2027 में होने जा रहा विधानसभा चुनाव है. यह महज चुनाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है, जिसे हम बखूबी मैदान में लड़ेंगे.
वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का भी परोक्ष रूप से जिक्र किया. मुझे इस बात की खुशी है कि देश के युवा घरों से निकलकर आएं और उन्होंने इस मौजूदा हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की कोशिश की, क्योंकि आज की तारीख में युवा इस बात को बखूबी समझ पा रहे हैं कि कैसे यह सरकार लोगों का दमन कर रही है.
डिपंल यादव ने महिलाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज की तारीख में महिलाओं की दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है. आलम यह है कि उन्हें अपने मनपसंद कपड़े की भी इजाजत नहीं है. यह लोग एक तरह से पूरे देश का माहौल बदलना चाहते हैं. ऐसी स्थिति में जिस तरह से देश का युवा निकलकर आया, वो सराहनीय है.
पप्पू यादव के संदर्भ में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वो हमारी पार्टी के नेता नहीं हैं, लेकिन मैं एक बात साफ कर देना चाहती हूं कि हम लगातार देश से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे. उन्हें जन जन तक पहुंचाने का काम करेंगे.
सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने भी कई मुद्दों का जिक्र करके केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद को लेकर कहा कि पप्पू यादव सहित अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. यह विरोद प्रदर्शन राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद को लेकर किया गया था जिसमें कई दलों के नेता शामिल हुए थे. हमारा यह विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा. यह जनता का पैसा था. आस्था का पैसा था, लेकिन भाजपा ने आस्था के नाम पर खिलवाड़ किया है. यह लोगों के मेहनत की कमाई थी, जिसे भाजपा और आरएसएस के लोगों ने चोरी की है. इस तरह की स्थिति को देश की जनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने वाली नहीं है
वही, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए जेन जी के विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी. उनके मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह इमोशन से भरा हुआ था. इसमें बड़ी संख्या में स्टूडेंट शामिल हुए थे. विरोध प्रदर्शन हो गया. सरकार ने मांग मानते हुए विरोध प्रदर्शन किया गया. अब पुलिस अधिकारियों को आगे करके उनकी बलि चढ़ाई जा रही है, जो गलत है. आपने स्टूडेंट से वादा किया था, जिसके बाद दो घंटे के अंदर जंतर मंतर खाली करके अपने घर चले गए. इसके बाद पुलिस प्रदर्शन में शामिल छात्रों को चिन्हित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उन्हें हिरासत में ले रही है. यह दोहरा रवैया ठीक नहीं है. मेहरबानी करके स्टूडेंट के साथ कोई राजनीति नहीं करें.
उन्होंने कहा कि स्टूडेंट के साथ जिस तरह से बर्बरता हुई है, उस पर सरकार को जवाब देना चाहिए, लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में नहीं आए हैं. इसके विपरीत छात्रों को हिरासत में लेकर उनके साथ निर्मम व्यवहार किया जा रहा है. इससे यह साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार अभी स्टूडेंट के साथ खड़ी नहीं है. विरोध में काम कर रही है. सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है.
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एसएचके/वीसी