अशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार से उड़ान योजना फिर से शुरू करने का आग्रह किया

जयपुर, 28 मई . राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे’ के मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर राज्य में ‘उड़ान योजना’ के तहत मुफ्त सैनिटरी नैपकिन वितरण कार्यक्रम को तुरंत और प्रभावी तरीके से फिर से शुरू करने की मांग की है.

पत्र में गहलोत ने योजना लंबे समय से बंद रहने पर चिंता जताई और कहा कि इसका सीधा असर राजस्थान की लड़कियों और महिलाओं के स्वास्थ्य तथा सम्मान पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं होने के कारण खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की कई किशोरियों और महिलाओं को असुरक्षित विकल्प अपनाने पड़ते हैं, जिससे संक्रमण और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

अशोक गहलोत ने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2021 में महिलाओं और लड़कियों के मासिक धर्म स्वच्छता और सम्मान को ध्यान में रखते हुए ‘आई एम शक्ति उड़ान योजना’ शुरू की थी. इस योजना के तहत राजस्थान की लाखों महिलाओं और छात्राओं को हर महीने मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाते थे.

उन्होंने कहा, “मासिक धर्म स्वच्छता केवल एक कल्याणकारी योजना का विषय नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और समानता से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है. किसी भी लड़की या महिला को केवल बुनियादी स्वच्छता उत्पादों की कमी के कारण अपने स्वास्थ्य से समझौता नहीं करना चाहिए.”

अशोक गहलोत ने कहा कि उड़ान योजना लाखों महिलाओं और किशोरियों के लिए एक मजबूत सहारा बन चुकी थी. इस योजना ने मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने और समाज में मौजूद झिझक व कलंक को कम करने में भी अहम भूमिका निभाई.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान शुरू की गई यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाने और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई थी. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि इतनी महत्वपूर्ण योजना लंबे समय से बंद पड़ी है.

अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से मांग की कि योजना को पूरी गंभीरता के साथ दोबारा शुरू किया जाए, Supreme Court के हालिया निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए और इसका लाभ सभी महिलाओं तक पहुंचाया जाए.

उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण इलाकों में मासिक धर्म स्वास्थ्य को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी अपील की. गहलोत ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता माना जाना चाहिए और सरकार को इस मुद्दे पर संवेदनशीलता तथा तत्परता के साथ काम करना चाहिए.

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