हेट स्पीच के मामलों में पुलिस कर रही Supreme Court के आदेश का उल्लंघन : अश्विनी उपाध्याय

नई दिल्ली, 6 सितंबर . वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और देवी-देवताओं के अपमान से जुड़े मामलों में पुलिस Supreme Court के निर्देशों का पालन नहीं कर रही है. ऐसे मामलों में पुलिस को किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार करने के बजाय स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए.

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रोटेस्ट के दौरान चर्चा में आई निशु आजाद पर देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप लगा है. उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई है.

से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से जब यह पूछा गया कि क्या अब तक एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना अदालत की अवमानना का मामला है तो उन्होंने कहा कि Supreme Court ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं.

उन्होंने कहा कि Supreme Court ने साफ निर्देश दिया है कि किसी भी अथॉरिटी को शिकायत का इंतजार नहीं करना चाहिए. जैसे ही पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से पता चलता है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है, देवी-देवताओं का अपमान किया जा रहा है या पवित्र ग्रंथों को फाड़ा अथवा जलाया जा रहा है, तो एसएचओ या एसीपी को बिना किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किए तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कई मामलों में पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करने की पहल नहीं करती. कई मामलों में औपचारिक शिकायत मिलने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की जाती. यह Supreme Court के आदेशों का सीधा उल्लंघन है और अदालत की अवमानना है.

हेट स्पीच के मामलों का जिक्र करते हुए अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि 28 अप्रैल 2023 को Supreme Court ने सभी राज्य सरकारों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे. जहां भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, देवी-देवताओं का अपमान करने या पवित्र धार्मिक ग्रंथों को फाड़ने या जलाने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, वहां पुलिस को किसी व्यक्ति की औपचारिक शिकायत का इंतजार नहीं करना चाहिए. पुलिस को स्वयं मामले का संज्ञान लेकर अपनी पहल पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए, लेकिन Supreme Court के इन निर्देशों के बावजूद देशभर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, देवी-देवताओं के अपमान और धार्मिक ग्रंथों को जलाने जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आती रहती हैं. इसके बावजूद पुलिस कई मामलों में स्वतः एफआईआर दर्ज करने के बजाय किसी व्यक्ति के औपचारिक रूप से सामने आने का इंतजार करती है. Supreme Court के आदेश में स्पष्ट है कि पुलिस को शिकायत का इंतजार नहीं करना है.

उन्होंने कहा कि परिणाम यह है कि लगातार धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं. जब लोग इसके खिलाफ प्रतिक्रिया देते हैं, तो कई बार उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो जाती है लेकिन जिन लोगों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होता.

अश्विनी उपाध्याय ने देशभर के एसीपी, डीसीपी और थानों के एसएचओ से Supreme Court के 28 अप्रैल 2023 के आदेश का पालन करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि मैं देश के सभी एसीपी, डीसीपी और थानों के एसएचओ से अपील करता हूं कि 28 अप्रैल 2023 का Supreme Court का आदेश पढ़ लीजिए और स्वतः संज्ञान लेना शुरू करिए. सोशल मीडिया के माध्यम से यदि कोई धार्मिक मामला सामने आता है और देवी-देवताओं का अपमान किया जा रहा है, तो पुलिस को खुद एफआईआर दर्ज करनी चाहिए. यदि पुलिस ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू नहीं करती है, तो वह Supreme Court में अवमानना याचिका दायर करने का कदम उठाएंगे.

डीकेएम/वीसी