
गुवाहाटी, 4 अगस्त . असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आवाज उठाई. उन्होंने सत्ताधारी जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन पर छात्रों की शिकायतों को पारदर्शी और समय पर तरीके से हल करने में विफल रहने का आरोप लगाया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम सरमा ने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने भर्ती अभ्यर्थियों की चिंताओं को करीब से देखा है और उनका मानना है कि उनकी मांगों को निष्पक्ष तरीके से सुना जाना चाहिए.
सीएम सरमा ने कहा, “झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान मुझे जेएसएससी-सीजीएल अभ्यर्थियों के दर्द, गुस्से और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं को करीब से देखने का मौका मिला.”
सीएम सरमा ने कहा कि अगर झारखंड सरकार ने अभ्यर्थियों द्वारा उठाई गई शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की होती तो मौजूदा अशांति को रोका जा सकता था.
उनके अनुसार राज्य प्रशासन की ओर से संवेदनशील और पारदर्शी प्रतिक्रिया से अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने में मदद मिलती.
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि परीक्षा में अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के बार-बार लग रहे आरोपों से राज्य में बड़ी संख्या में युवा नौकरी चाहने वालों का भविष्य अनिश्चित हो गया है.
सीएम सरमा ने कहा, “दुर्भाग्य से अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं और आज लाखों युवाओं का भविष्य संकट में है.”
आंदोलन कर रहे छात्रों को अपना “नैतिक समर्थन” देते हुए असम के मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार से उनकी जायज मांगें मानने और न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा, “मैं झारखंड के छात्रों और युवाओं के इस न्यायसंगत आंदोलन के लिए अपना नैतिक समर्थन व्यक्त करता हूं और राज्य सरकार से आग्रह करता हूं कि वह छात्रों की जायज मांगों को तुरंत स्वीकार करे और उन्हें न्याय दिलाए. युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है.”
सीएम सरमा का यह बयान रांची में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जहां छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारी 19 अप्रैल को हुई 14वीं जेएसपीसी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और राज्य की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय एजेंसियों, जिनमें केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय शामिल हैं, से स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं.
–
डीएससी