
लखनऊ, 31 अक्टूबर . समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को रामपुर जेल से रिहाई के कुछ ही देर बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिरासत में ले लिया. दो पैनकार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम आजम खां अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ जेल से बाहर निकले थे. जेल के मुख्य द्वार पर पहले से मौजूद ईडी की टीम ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और पूछताछ के लिए गाजियाबाद स्थित कार्यालय ले गई.
वहीं, अब्दुल्ला आजम को रिहाई मिलने के बाद वह सीधे अपने घर चले गए. जेल से बाहर आने के बाद आजम खां ने मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “अब कहने को क्या है? मैं क्या कहूं? कानून का वजूद खत्म हो चुका है. क्या यह एक मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई. यही हमारा गुनाह है. हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए. क्या यह हमारा गुनाह है?”
आजम खां को हिरासत में लेने के लिए ईडी की टीम भारी सुरक्षा बल के साथ रामपुर जेल पहुंची थी. टीम के साथ चार थानों की पुलिस और करीब 50 सीआरपीएफ जवान मौजूद थे. शाम करीब 6:15 बजे ईडी की टीम जेल के मुख्य द्वार पर पहुंच गई थी. इसके बाद शाम सात बजे जैसे ही आजम खां जेल से बाहर निकले, अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया और एक आदेश दिखाते हुए हिरासत में ले लिया.
इस दौरान कुछ देर तक अधिकारियों और आजम खां के बीच बातचीत भी हुई. ईडी की कार्रवाई के दौरान जेल के बाहर मौजूद सपा समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी. समर्थकों में रिहाई की खुशी के बीच अचानक हुई इस कार्रवाई से नाराजगी देखने को मिली. काफी देर तक असमंजस की स्थिति बनी रही. बाद में जेल से बाहर आए अब्दुल्ला आजम का समर्थकों ने स्वागत किया.
रामपुर के एएसपी अनिल सिंह सिसोदिया ने बताया कि ईडी की टीम आजम खां को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए गाजियाबाद मुख्यालय ले गई है. इस कार्रवाई पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरा. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि आज के हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि जब वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है. आजम खां के खिलाफ मुकदमों की साजिश को पूरा देश ही नहीं, पूरी दुनिया देख रही है.
उन्होंने कहा कि एक उम्रदराज व्यक्ति को इस तरह के मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल भेजना बेहद कायराना हरकत है. सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, वक्त बदलने पर उसे खुद भी इसका सामना करना पड़ेगा.
दरअसल, दो पैनकार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला आजम को 17 नवंबर 2025 को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सात-सात साल की सजा सुनाई थी. दोनों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था. इस फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी. बीते 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी. जमानत के आदेश के बाद रामपुर की अदालतों में रिहाई की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में दो दिन लग गए.
आजम खां और अब्दुल्ला आजम की ओर से अलग-अलग मामलों में जमानती दाखिल किए गए थे. इनके सत्यापन के बाद एमपी-एमएलए अदालतों से रिहाई परवाने जारी किए गए. शनिवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ. आजम खां करीब 11 महीने 14 दिन बाद जेल से बाहर आए थे. उनकी रिहाई की खबर मिलते ही दोपहर से ही बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता और समर्थक रामपुर जेल के बाहर जुटने लगे थे.
समर्थकों को उम्मीद थी कि आजम खां और अब्दुल्ला आजम की रिहाई के बाद जोरदार स्वागत होगा, लेकिन जेल के गेट पर ईडी की टीम की मौजूदगी ने जश्न को मायूसी में बदल दिया. गौरतलब है कि ईडी ने 13 अक्टूबर को जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां समेत पांच लोगों के खिलाफ अजीमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसमें विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं. इसी मामले में ईडी की कार्रवाई को आजम खां की रिहाई के तत्काल बाद हुई हिरासत से जोड़कर देखा जा रहा है.
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विकेटी/एमएस