हरियाली अमावस्या पर बाबा महाकाल का अलौकिक शृंगार, हरी भांग और बेलपत्र की माला से सजे देवाधिदेव

उज्जैन, 12 अगस्त . सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या, जिसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है, पर बुधवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दृश्य बेहद दिव्य और मनोहारी रहा. इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल को हरी भांग और हरे बेलपत्र की माला से सजाया गया और भस्म रमाकर विशेष शृंगार किया गया.

देर रात से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं. हजारों भक्त अपने आराध्य बाबा महाकाल के अलौकिक दर्शन के लिए रातभर इंतजार करते रहे. मंदिर परंपरा के अनुसार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई. इसके बाद ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ ठीक रात 3 बजे बाबा महाकाल के गर्भगृह के कपाट खोले गए.

भस्म आरती से पहले पुजारियों ने बाबा का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया. इसके बाद बाबा महाकाल को हरी भांग की पत्तियों से सजाया गया. गले में हरे बेलपत्र की माला पहनाई गई. सावन माह और हरियाली अमावस्या के महत्व को देखते हुए यह शृंगार विशेष रूप से किया जाता है. हरे रंग को प्रकृति, समृद्धि और शिव के प्राकृतिक स्वरूप का प्रतीक माना जाता है.

घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए बाबा का दिव्य स्वरूप को देखकर भक्त भावविभोर हो गए और पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयकारों से गूंज उठा. भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को गर्भगृह में बाबा महाकाल के दर्शन हुए. मान्यता है कि हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव की विशेष पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है.

वहीं, सावन माह होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक थी. मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. कतारों को सुचारू रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है.

पीआईएम/एएस