
रांची, 30 सितंबर . झारखंड आंदोलनकारियों की पेंशन, आश्रितों को नौकरी और आंदोलनकारी के तौर पर चिह्नीकरण के लिए जेल जाने की शर्त खत्म करने की मांग को लेकर बुलाए गए झारखंड बंद का बुधवार को राज्य में मिला-जुला असर देखने को मिला. पलामू, गिरिडीह और बोकारो समेत कुछ जिलों में आंदोलनकारियों ने प्रमुख सड़कों और चौक-चौराहों पर प्रदर्शन कर यातायात बाधित किया, जबकि राजधानी रांची समेत कई शहरों में बाजार और स्थानीय परिवहन सामान्य रूप से चलते रहे.
पलामू जिले के मेदिनीनगर में बंद का अपेक्षाकृत व्यापक असर रहा. आंदोलनकारी तीर-धनुष और पारंपरिक हथियारों के साथ सड़क पर उतरे और रेड़मा चौक को जाम कर दिया. कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और कुछ देर के लिए सड़क पर लेटकर भी विरोध जताया. इससे दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई और स्कूली बच्चों, राहगीरों तथा लंबी दूरी के यात्रियों को परेशानी हुई.
गिरिडीह में आंदोलनकारियों ने पपरवाटाड़ स्थित पुराने टोल प्लाजा के पास गिरिडीह-डुमरी मुख्य मार्ग को जाम कर दिया. प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर नारेबाजी करते रहे. बाद में पुलिस ने बातचीत कर जाम हटवाया. बोकारो के चास स्थित आईटीआई मोड़ पर भी आंदोलनकारियों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, जिससे कुछ समय के लिए स्थानीय और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही. राजधानी रांची में बंद का असर सीमित रहा. सुबह आंदोलनकारियों ने अलबर्ट एक्का चौक के पास कुछ समय के लिए यातायात बाधित किया.
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने तथा बातचीत के बाद जाम हटा लिया गया. इसके बाद आंदोलनकारी पास स्थित सीपीआई कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए. शहर के अधिकांश बाजार खुले रहे और ऑटो तथा बसों का परिचालन भी जारी रहा. चतरा और गढ़वा में बसों तथा बड़े व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की सूचना है. रामगढ़ और धनबाद के कुछ इलाकों में आंदोलनकारियों ने दुकानदारों से बंद का समर्थन करने की अपील की. कुछ स्थानों पर स्थानीय आवागमन भी प्रभावित हुआ.
बंद के दौरान लंबी दूरी की बस सेवाओं पर अधिक असर देखने को मिला. जमशेदपुर, रांची, धनबाद और हजारीबाग से बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा राज्य के विभिन्न जिलों के लिए चलने वाली कुछ बस सेवाएं सुरक्षा कारणों से प्रभावित रहीं. हालांकि, राज्य के प्रमुख रेल मार्गों पर ट्रेन परिचालन सामान्य रहा. शहरों के भीतर ऑटो और ई-रिक्शा का परिचालन भी अधिकांश स्थानों पर जारी रहा, लेकिन हाईवे से जुड़े चौक-चौराहों पर जाम के कारण स्थानीय यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ. मोर्चा के नेताओं पुष्कर महतो और पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों की कई मांगें लंबित हैं. उन्होंने कहा कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं होने पर 15 नवंबर, झारखंड स्थापना दिवस से राज्यभर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया जाएगा.
–
एसएनसी/एएस