बेंगलुरु: उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग नहीं होनी चाहिए: वीरेंद्र सिंह सोलंकी

बेंगलुरु, 13 सितंबर . अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बेंगलुरु में उमर खालिद पर प्रस्तावित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध किया है. परिषद के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि इस तरह की स्क्रीनिंग को रोका जाना चाहिए और जब तक संबंधित मामला अदालत में विचाराधीन है, तब तक ऐसी किसी भी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन उचित नहीं है.

वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि उस स्क्रीनिंग को रोका जाना चाहिए. हमें यह सोचना चाहिए कि हम छात्रों को किस व्यक्ति की डॉक्यूमेंट्री दिखाना चाहते हैं. ऐसा व्यक्ति उमर खालिद, जिसके बारे में कहा जाता है कि जेएनयू के अंदर देश के खिलाफ नारे लगाए गए थे, उसकी डॉक्यूमेंट्री विद्यार्थियों को दिखाई जाएगी? क्या कर्नाटक सरकार एक तरह से कर्नाटक के विद्यार्थियों के बीच ऐसा नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास कर रही है?

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद इसकी स्क्रीनिंग रोकने की मांग करती है. हमने बेंगलुरु में जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया है कि इसकी स्क्रीनिंग रोकी जाए. यदि उमर खालिद पर कोई फिल्म या डॉक्यूमेंट्री बनाई जाती है, तो यह ठीक नहीं होगा. देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति देश के खिलाफ नारे लगाता है और देशविरोधी गतिविधियों से जुड़ा पाया जाता है, जो आज जेल में है, उसकी डॉक्यूमेंट्री बनाकर उसे सकारात्मक रूप में देश के सामने प्रस्तुत करना उचित नहीं है. यह बिल्कुल भारत के अंदर नहीं चलेगा. देश की छात्र शक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगी और विद्यार्थी परिषद इसका कड़ा विरोध करती है.

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उमर खालिद आरोपी है या नहीं, यह अदालत तय करेगी. लेकिन जब मामला अदालत में विचाराधीन है, तब आप डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से उस मामले को प्रभावित करना चाहते हैं. इसलिए इस पर अभी किसी भी प्रकार की डॉक्यूमेंट्री नहीं दिखाई जानी चाहिए. जब तक मामला न्यायालय में लंबित है, तब तक ऐसी स्क्रीनिंग नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि यदि बाद में अदालत का फैसला आ जाए और उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट मिल जाए, तब डॉक्यूमेंट्री बनाई जाए और उसकी स्क्रीनिंग करवाई जाए. लेकिन यदि वह दोषी साबित होता है और यह सिद्ध होता है कि देश के खिलाफ नारे लगाए गए थे, तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. इसके साथ ही डॉक्यूमेंट्री बनाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

एएमटी/डीकेपी