
नई दिल्ली, 15 जुलाई . बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी हत्याकांड से जुड़ी याचिका पर Supreme Court ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता को पहले पटना हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी.
Supreme Court ने कहा कि मामले में पहले हाईकोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए. वहां से राहत नहीं मिलने या जरूरत पड़ने पर ही आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.
यह याचिका प्रिया मिश्रा की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने दाखिल की थी. याचिका में मांग की गई थी कि पूरे मामले की जांच Supreme Court के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की निगरानी में कराई जाए. इसके साथ ही आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और एनकाउंटर के दौरान मौजूद अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई थी.
इससे पहले भी भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में Supreme Court ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई से इनकार किया था. उस याचिका को अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दाखिल किया था, जिसमें एनकाउंटर को कथित तौर पर फर्जी बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की गई थी. Supreme Court ने दोनों मामलों में याचिकाकर्ताओं को पहले पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है.
इससे पहले, जब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले का जिक्र किया गया था, तो Supreme Court ने इस पर तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया था और याचिकाकर्ता को मामले को लिस्ट कराने के लिए Supreme Court की रजिस्ट्री से संपर्क करने का निर्देश दिया था.
इस जनहित याचिका में भोजपुर में 17 जून को भरत भूषण तिवारी की एनकाउंटर में हुई मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है. साथ ही, Supreme Court के पूर्व जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच और सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की गई है. याचिका के अनुसार, एनकाउंटर में होने वाली मौतें गैर-न्यायिक हत्याओं के बराबर हैं और लोकतांत्रिक समाज में कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं. एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मी अक्सर एक ही तरह का तर्क देते हैं कि मारे गए व्यक्ति ने भागने की कोशिश करते हुए हथियार छीनने और गोली चलाने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की.
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एसएके/पीएम