दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता, तमिलनाडु से 12 साल से फरार 50 हजार के इनामी जालसाज को पकड़ा

नई दिल्ली, 10 अगस्त . दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 साल से फरार चल रहे 50,000 रुपए के इनामी घोषित अपराधी को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है. आरोपी जाली लेटरहेड से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल जालसाजी मामले में वांछित था.

क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज ने आरोपी मनोहरन कंधसामी को 4 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के तिरुचेंगोडे के बाहरी इलाके में एक गोदाम से पकड़ा. गिरफ्तारी के समय वह पोल्ट्री का काम कर रहा था. यह मामला एफआईआर नंबर 33/2008 से जुड़ा है, जो पीएस मंदिर मार्ग, नई दिल्ली में धारा 465/468 आईपीसी के तहत दर्ज है. इसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही थी.

इससे पहले 2007 में हैदराबाद निवासी विजय कुमार ने शिकायत दी थी कि धर्मशाला में ठहरने के दौरान उनके सोने के गहने और कीमती सामान चोरी हो गए थे. एफआईआर 384/2007 धारा 380 आईपीसी में दर्ज की गई थी.

जांच में कर्नाटक के मंगलुरु निवासी मनोहरन कंधसामी को पकड़ा गया. उसके पास से चोरी का सामान तो नहीं मिला, लेकिन कई प्रिंटेड और खाली लेटरहेड मिले, जो कथित तौर पर जाने-माने राजनीतिक कार्यालयों और सरकारी अधिकारियों के नाम पर थे. जांच में सभी दस्तावेज नकली पाए गए. इसके बाद जालसाजी का अलग केस दर्ज हुआ और दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई.

आरोपी को एक बार गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, लेकिन करीब एक महीने बाद उसे जमानत मिल गई. इसके बाद वह जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया. लगातार गैर-हाजिरी के कारण 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट के सीएमएम ने उसे ‘अपराधी’ घोषित कर दिया. बाद में उसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपए का इनाम घोषित किया गया.

एसीपी सेंट्रल रेंज सतेंद्र मोहन के नेतृत्व और डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम के पर्यवेक्षण में इंस्पेक्टर महिपाल सिंह, एसआई अंकित, गौरव और अन्य की टीम बनाई गई. एचसी नवीन ने तकनीकी विश्लेषण कर आरोपी के मोबाइल नंबर का पता लगाया. एक महीने से ज्यादा तकनीकी निगरानी और तमिलनाडु में फील्ड इंटेलिजेंस के बाद टीम ने आरोपी को तिरुचेंगोडे में ट्रेस किया.

पूछताछ में 62 वर्षीय मनोहरन ने बताया कि जमानत पर छूटने के बाद उसे दोबारा जेल जाने का डर था, इसलिए वह फरार हो गया. उसने अपने पुराने संपर्क तोड़ दिए और परिवार के साथ तमिलनाडु में बस गया. वहां वह पोल्ट्री फार्म चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था. वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं.

डीसीपी आदित्य गौतम ने कहा कि कोई भी ठिकाना कानून की पहुंच से बाहर नहीं है. इसे हमने तकनीकी निगरानी और अंतर-राज्यीय समन्वय से साबित किया है.

एससीएच/एबीएम