
नई दिल्ली, 30 जुलाई . राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. खड़गे के वक्तव्य पर केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस नेताओं ने उनके बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला जा रहा है. वहीं, समाजवादी पार्टी ने पूरे विवाद को छात्रों के मुद्दों से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि खड़गे ने चर्चा के दौरान विधेयक पर कोई सार्थक बात नहीं की. खड़गे ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि मैं उन्हें यहां घसीटकर लाऊंगा. खड़गे सदन में मनुस्मृति की एक नकली प्रति लेकर आए. हम तो बस यही कह रहे थे कि समाज में किसी को भी बंटवारा नहीं करना चाहिए.
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि खड़गे को उनकी सरकार की कुर्सी की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. खड़गे स्वयं दलित समाज से आते हैं, इसलिए उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. केंद्र सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है और सरकार को अपनी स्थिरता की कोई चिंता नहीं है. उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने नियमों के अनुरूप बात नहीं की और किरण रिजिजू ने उन्हें कई बार संसदीय मर्यादा का पालन करने की सलाह दी. नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा बनाए रखना राहुल गांधी की जिम्मेदारी है और खड़गे के आरोपों में कोई तथ्य नहीं है.
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि सरकार ने पूरे मामले में हमेशा संयम का परिचय दिया है. सरकार ने समय-समय पर सभी आवश्यक कदम उठाए हैं और देश ने सरकार के रवैये को देखा और समझा है. खड़गे के मौजूदा बयान का कोई विशेष महत्व नहीं है.
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा की कार्यवाही को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. भाजपा सांसदों ने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके बाद खड़गे ने अपने बयान में संशोधन किया. कांग्रेस नेतृत्व लगातार इसी तरह की भाषा का प्रयोग कर रहा है और यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है. जनता लगातार कांग्रेस को नकार रही है और ऐसी भाषा का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से भी नुकसानदायक साबित होगा.
वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने इस पूरे विवाद को अलग दृष्टिकोण से देखा. उन्होंने कहा कि सदन के भीतर दो नेताओं के बीच हुई बातचीत को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों की समस्याओं पर ध्यान दिया होता, उनकी बात सुनी होती और उनके आंदोलनों को गंभीरता से लिया होता, तो न लाठीचार्ज की नौबत आती और न ही देश में इतना तनाव और अशांति का माहौल बनता.
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मल्लिकार्जुन खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि खड़गे ने जो कुछ भी कहा, उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था. उन्होंने कहा कि हम आपको आमंत्रित कर रहे हैं, आपको आना चाहिए. जहां आपकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है, वहां आप नहीं आ रहे हैं, कल जनशक्त के बदौलत आपको उखाड़ लाएंगे वहां से. जब जनशक्ति परिवर्तन कर देगी सत्ता में तो आपको हटना पड़ेगा न, यही आशय था उनका.
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पीएसके