सड़क हादसे रोकने में एआई की भूमिका पर आईआईटी मद्रास में मंथन

कोलकाता, 4 नवंबर . सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए भू-स्थानिक डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर बुधवार को आईआईटी मद्रास में आयोजित एक विशेष चर्चा में विचार-विमर्श किया गया.

इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व Supreme Court न्यायाधीश और सड़क सुरक्षा संबंधी Supreme Court समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे तथा समिति के सदस्य संजय बंदोपाध्याय ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में छात्रों, विशेषज्ञों और नवाचार से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया.

चर्चा के दौरान न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत दिशा में ड्राइविंग, रेड लाइट जंप करना, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल, असुरक्षित ओवरटेकिंग तथा चालक की थकान और तनाव सड़क हादसों की मुख्य वजह हैं.

उन्होंने प्रभावी समाधान विकसित करने के लिए मूलभूत सिद्धांतों (फर्स्ट प्रिंसिपल्स थिंकिंग) पर आधारित सोच की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

कार्यक्रम में तमिलनाडु सरकार और आरबीजी लैब्स द्वारा विकसित रोड सेफ्टी इनोवेशन हब का भी परिचय कराया गया. यह मंच छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को अपने विचार साझा करने, उनका परीक्षण करने और उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है.

यह हब आईआईटी मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी जैसे शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर सड़क सुरक्षा के लिए नई तकनीकों और डेटा आधारित समाधानों के विकास एवं क्रियान्वयन पर कार्य करता है.

इसका मुख्य उद्देश्य डेटा आधारित सुरक्षा उपायों, स्मार्ट मोबिलिटी टूल्स, कम लागत वाले इंजीनियरिंग समाधान और उभरती सुरक्षा तकनीकों के जरिए सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या को कम करना है.

कार्यक्रम में बताया गया कि यह पहल ओडिशा और आईआईटी दिल्ली जैसी संस्थाओं की तकनीक-आधारित सड़क सुरक्षा योजनाओं के अनुरूप भी है.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 1,77,177 लोगों की मौत हुई. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 2.3 प्रतिशत अधिक थी.

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सड़क हादसों में प्रतिदिन औसतन 485 लोगों की मौत होती है, जबकि हर घंटे करीब 20 लोगों की जान जाती है.

मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,68,491 लोगों की मौत हुई थी, जो 2023 में बढ़कर 1,72,890 और 2024 में 1,77,177 हो गई.

मृतकों में 46.2 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक और 20.6 प्रतिशत पैदल यात्री शामिल हैं. वहीं, सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 66.1 प्रतिशत लोग 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जबकि 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी 83.3 प्रतिशत है.

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एएमटी/पीएम