
नई दिल्ली, 13 सितंबर . उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार को कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी. उन्होंने राहुल गांधी की मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात, ब्रिक्स में फूड-मेन्यू विवाद, हल्द्वानी विवाद और भारत के ऐतिहासिक नैरेटिव पर विस्तार से चर्चा की.
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर हरीश रावत ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा, “ब्रिक्स में कुछ सवालों पर एक राय बनी, जो अच्छी बात है, लेकिन कुछ और बड़े सवाल हैं. आज जो युद्ध हो रहे हैं, उसमें हथियारों की खतरनाक होड़ दिखाई दे रही है. एआई के आने के बाद कहीं ऐसा नहीं है कि इसका हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाए. यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है. इस पर विस्तार से बात करनी चाहिए. दुनिया के अंदर किसी एक देश की मोनोपोली नहीं होनी चाहिए. हमें उम्मीद थी कि डॉलर के विकल्प के तौर पर भी बात होगी कि स्थानीय करेंसी को कैसे बल मिल सके. सिर्फ एक साझा बयान जारी करना ही काफी नहीं है.”
ब्रिक्स में आतंकवाद पर बनी सहमति पर उन्होंने कहा, “पहलगाम का भी जिक्र हुआ. आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने पर सहमति बनी और ब्रिक्स देशों ने अपनी चिंता जाहिर की, लेकिन चीन को यह बताने की जरूरत है कि तुम पड़ोसी देश को सहारा देते हो. पाकिस्तान हमारे खिलाफ आतंकी कैंप लगा रहा है, ऐसे में उसे कौन कंट्रोल करेगा. सीमा पर चीन और भारत के बीच तनाव है. दोनों देशों के बीच सीमाओं पर सामान्य स्थिति कैसे पैदा की जा सके, उस पर बात करनी चाहिए. मित्रता तभी आगे बढ़ सकती है, जब साफ-साफ बातें की जाएं.”
ब्रिक्स में शाकाहारी भोजन परोसने को लेकर उठे विवाद पर रावत ने कहा, “डिनर को लेकर आंतरिक राजनीति करेंगे तो उसमें बहुत सारी बातें उठेंगी. उसके लिए सभी को तैयार रहना चाहिए. डिनर में एक साथ पूरे देश की झलक जानी चाहिए, लेकिन वहां पर भाजपा की झलक दे रहे हैं. ऐसा करेंगे तो सवाल उठेंगे ही.”
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद राहुल गांधी से मुलाकात पर हरीश रावत ने कहा, “बहुत अच्छा लगा. मलेशिया से हमारे आजादी से पहले के संबंध हैं. हमारे रिश्ते अच्छे हैं. हमेशा परंपरा रही है कि नेता प्रतिपक्ष से भी विदेशी मेहमान मिलते रहे हैं.”
वहीं, हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ विवाद के मामले में दर्ज एफआईआर पर पूर्व सीएम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “वहां जो हुआ, वह संविधान पर हमला है. यह एससी/एसटी एक्ट का अपमान है. जिन्होंने ऐसा किया, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. कानून की नजर में वे अपराधी हैं.”
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एससीएच/डीकेपी